वाराणसी। राष्ट्रीय ललित कला अकादमी पुरस्कार जीतने के बाद डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि सफलता का कोई शार्टकट नहीं होता है। मेहनत और लगन होगी तो जीवन के हर क्षेत्र में सफलता अवश्य मिलेगी। पिछले तीन साल से मैं प्रयास कर रहा था। जिसका फल मुझे मिला है। रामनगर की रामलीला की शृंखला के लिए पुरस्कृत होने पर बहुत खुशी मिली। मुझे यह अहसास हुआ कि अगर आप किसी भी काम को मन लगाकर करते हैं तो सफलता आपके कदम जरूर चूमती है।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के ललित कला विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि मैं सेमी रियलिस्टिक पेंटिंग करता हूं। जो भी बनाता हूं, हृदय से बनाता हूं और मुझे अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा था। कई बार लोगों ने मुझे भ्रमित करने की कोशिश भी की। लेकिन मैंने अपनी शैली को नहीं छोड़ा। तीन बार चयन के बाद यह पुरस्कार प्राप्त हुआ है। सेमी रियलिस्टिक चित्रों की खास बात यह है कि दर्शक इनको देखकर ही समझ जाते हैं। बीएचयू से शिक्षा प्राप्त करने वाले डॉ. सुनील को 2016 में राज्यस्तरीय पुरस्कार मिल चुका है। वह 2015 से 17 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सदस्य भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह नेशनल गैलरी आफ माडर्न आर्ट और ललित कला अकादमी लखनऊ के भी सदस्य हैं। डॉ. सुनील की चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन मुंबई के सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट में 25 मार्च को होगा।