वाराणसी। बीएचयू सामाजिक विज्ञान संकाय में आयोजित प्रवासी भारतीय युवा संसद के समापन समारोह में कुलाधिपति न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय ने छात्र-छात्राओं को अनुशासन के साथ आगे बढ़ते रहने का मूल मंत्र दिया। कहा कि जीवन में अनुशासन का बड़ा महत्व होता है, इसको बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। समारोह में न्यायमूर्ति ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर पुरस्कृत किया।
पॉलिटिकल डिस्कशन क्लब की ओर से कराए गए तीन दिवसीय संसद में युवाओं ने बेरोजगारी, आरक्षण, कौशल विकास, शतप्रतिशत मतदान आदि के मुद्दे पर बहस किया। समापन समारोह में कुलाधिपति ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा विश्वविद्यालय के स्थापना को लेकर किए गए संघर्षों की चर्चा करते हुए कहा कि बीएचयू की स्थापना के समय महामना की सोच थी कि जितने प्रौद्योगिकीय ज्ञान हो वह अपनी भाषा (हिन्दी) में विद्यार्थियों को दिए जाएं। छात्रों से उनके विचारों का अनुसरण करने का आह्वान किया। युवा संसद को बेहतर प्रयास बताते हुए कहा कि युवाओं के मुद्दे पर बहस जरूरी है, इससे आत्मनिर्भरता के साथ ही तर्क करने की क्षमता का विकास होता है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि युवा दिग्भ्रमित हो नहीं रहे हैं बल्कि उन्हें दिग्भ्रमित किया जा रहा है। इससे सचेत रहने की जरूरत है। बीएचयू कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने कहा कि युवाओं के बल पर देश की तस्वीर बदली जा सकती है। ऐसे में उनकी ऊर्जा का सकारात्मक दिशा में उपयोग जरूरी है। अतिथियों का स्वागत सामाजिक विज्ञान संकाय प्रमुख प्रो. आरपी पाठक ने किया। इस दौरान युवा संसद के प्रतिभागी निखिल द्विवेदी, सौम्यवीर सोम, सौरभ प्रकाश आदि को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।