वाराणसी। दीवानी कचहरी के गेट नंबर दो के समीप अधिवक्ताओं की चौकी के नीचे हैंडग्रेनेड बरामद हुए दो साल बीत गए लेकिन पुलिस की तफ्तीश जहां की तहां रुकी पड़ी है। पुलिस दो साल बाद यह तक पता नहीं लगा सकी है कि हैंडग्रेनेड कहां से आया था। उसे किस उद्देश्य से अधिवक्ताओं की चौकी के नीचे रखा गया था। मामले की अब तक की तफ्तीश में कोई भी ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आ पाया है। अब तक की लचर तफ्तीश को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि यह मामला फाइलों के बीच ही दबकर दम तोड़ देगा।
23 अप्रैल 2016 को कचहरी परिसर में हैंडग्रेनेड बरामद होने का मामला सार्वजनिक होते ही शहर भर में हड़कंप मच गया था। डॉग स्क्वॉड और बम निरोधक दस्ते के साथ पुलिस ने घंटों कचहरी परिसर खंगाला था। बम निरोधक दस्ते के अनुसार बरामद हैंडग्रेनेड सर्विस एचई 36 ग्रेनेड था ,जो सेना या अर्धसैनिक बलों द्वारा युद्ध के दौरान प्रयोग में लाया जाता है। मामले को लेकर तत्कालीन कचहरी चौकी प्रभारी त्रिवेणी सिंह की तहरीर पर कैंट थाने में अज्ञात के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। तब मामले की विवेचना के साथ ही कचहरी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा कर उसे पुख्ता करने के तमाम दावे भी किए गए थे लेकिन अब तक कहीं कुछ नहीं हुआ। जबकि, हैंडग्रेनेड बरामद होने से पहले 23 नवंबर 2007 को कचहरी परिसर में आतंकियों ने सिलसिलेवार धमाके कर बड़े पैमाने पर जनधन की हानि की थी। इसके बावजूद कचहरी परिसर की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था आज तक नहीं की जा सकी है।
विवेचना में लापरवाही से अधिवक्ता नाराज
हैंडग्रेनेड मामले की विवेचना में पुलिस की लापरवाही से अधिवक्ता नाराज हैं। उनका कहना है कि इतने गंभीर मामले में तफ्तीश को लेकर पुलिस का लापरवाह रवैया समझ से परे है। कचहरी आतंकी हमले का निशाना बन चुकी है। यहां हजारों लोगों की रोजाना आवाजाही होती है, बावजूद इसके सुरक्षा के प्रति पुलिस-प्रशासन गंभीर नहीं है। बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि हैंडग्रेनेड प्रकरण की विवचेना अब तक शून्य है। न गवाहों का बयान हुआ, न आरोपी चिह्नित हुए और न किसी की गिरफ्तारी हुई। कहा कि प्रकरण के बारे में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ट्वीट कर मामले की जांच एनआईए से कराने की मांग की गई है।