फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रमाणपत्र मैनुअल, व्यवस्था कंप्यूटराइज्ड

विज्ञापन
विज्ञापन
वाराणसी। प्रदूषण जांच के नाम पर खानापूर्ति ने शहर के पर्यावरण की हालत बदतर कर दी है। प्रदूषण नियंत्रण के तय प्रावधानों का भी अनुपालन नहीं कराया जा रहा है। मनमानी और कमाई के खेल में नियम-प्रावधान दरकिनार कर दिए गए हैं। इसकी एक बानगी, प्रदूषण जांच केंद्रों पर आप देख सकते हैं। यहां स्मोक चेकर मशीन से वाहनों के प्रदूषण की जांच के बाद उन्हें तय व्यवस्था के तहत कंप्यूटराइज्ड प्रमाणपत्र मिलना। मशीन के कंप्यूटर से लिंक होने के चलते जब कंप्यूटराइज्ड प्रमाणपत्र जारी होता है तो उसमें जांच का विवरण अपने आप दर्ज हो जाता है। बावजूद इसके यहां केंद्रों पर अक्सर वाहन स्वामियों को मैनुअल प्रमाणपत्र थमा दिया जाता है। प्रावधानों की खुलेआम अनदेखी के बावजूद जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं।
विज्ञापन

वाहनों के प्रदूषण की जांच के लिए शहर में नौ प्रदूषण जांच केंद्र खोले गए हैं। परिवहन विभाग की ओर से इन केंद्रों का संचालन निजी एजेंसियों के जरिए कराया जाता है। इन केंद्रों पर प्रदूषण की जांच के लिए स्मोक चेकर मशीन और कंप्यूटर सिस्टम मुहैया कराया गया है। मशीन को कंप्यूटर से लिंक कर वाहनों की जांच करने और उन्हें कंप्यूटराइज्ड प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था है। जबकि परिवहन आयुक्त कार्यालय की ओर से भी जांच केंद्रों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह कंप्यूटर के जरिए ही प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र जारी करेंगे। बावजूद इसके इन केंद्रों से कंप्यूटराइज्ड की जगह अक्सर मैनुअल प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
विभागीय सूत्रों की मानें तो सारा खेल मैनुअल प्रमाणपत्र जारी करने की आड़ में ही चलता है। अधिकतर केंद्रों पर स्मोक चेकर मशीन को कंप्यूटर से लिंक नहीं किया जाता। मशीन से जांच के बाद वाहन स्वामियों को हाथ से उसका विवरण भरकर थमा दिया जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि वाहन स्वामी अपनी सुविधा के अनुरूप प्रमाणपत्र जारी करा लेते हैं। एक केंद्र पर काम के अनुरूप तीन से चार कर्मचारियों की नियुक्ति होनी चाहिए लेकिन यहां अधिकतर केंद्रों पर एक ही कर्मचारी तैनात है। जानकारों का दावा है कि शहर में बढ़ते प्रदूषण के पीछे वाहनों से होने वाला प्रदूषण बड़ी वजह है। पारदर्शी तरीके से कंप्यूटराइज्ड जांच व्यवस्था अपनाए जाने पर ही हालात सुधारा जा सकता है।
विज्ञापन

एक वाहन चेक करने में लगता है 10 से 15 मिनट
वाराणसी। प्रदूषण जांच केंद्रों पर मौजूद स्मोक चेकर एक वाहन के प्रदूषण की जांच करने पर करीब दस से पंद्रह मिनट का समय लगता है। वाहनों के साइलेंसर में स्मोक चेकर को डालकर प्रदूषण मापा जाता है। एक बार जांच करने के बाद स्मोक चेकर को पेट्रोल से धोया जाता है। इसके बाद वह किसी अन्य वाहन की जांच करने के काम में लाया जाता है। प्रदूषण जांच केंद्रों पर बैठे कर्मचारी इसे परेशानी मानते हैं और इस परेशानी से बचने के लिए वह मशीनों से जांच करने की प्रक्रिया से बचते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें