वाराणसी। एएसआईएससी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के वार्षिक सम्मेलन में शुक्रवार को बच्चों की शिक्षा में तकनीकी उन्नयन, स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, स्कूलों और शिक्षकों के सामने आ रही चुनौतियों, आरटीई पर चर्चा की गई। एएसआईएससी की प्रेसिडेंट डॉ. सुषमा राजकुमार ने कहा कि स्कूली शिक्षा में तकनीक का समावेश बेहद जरूरी है। बताया कि इंटरनेट के कारण बच्चे काफी कुछ सीख रहे हैं। उनकी अपेक्षाएं शिक्षकों से बढ़ गई हैं।
हम ऐसी तकनीकी विकसित करने जा रहे हैं जिससे आने वाले समय में बच्चों को होमवर्क, प्रोजेक्ट वगैरह ऑनलाइन दे सकें। घर बैठे उनके प्रोजेक्ट्स वगैरह देख सकें। आउट ऑफ क्लास भी बच्चों और शिक्षकों के बीच समन्वय बना रहे। हरनाल कॉलेज लखनऊ की प्रिंसिपल डॉ. माला मेहरा का कहना था कि आजकल बच्चाें की पढ़ाई से ज्यादा उनकी सुरक्षा पर बात हो रही है। पढ़ाई कहीं पीछे छूट गई है जबकि स्कूल का काम पढ़ाना है। रेयान जैसी घटना ना हो इसलिए जरूरी है कि सभी बसों में सीसीटीवी कैमरे और ट्रैकर लगाए जाएं।
सीएमएस लखनऊ की प्रिंसिपल मंजीत बत्रा ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी है कि समय-समय पर बच्चों की काउंसलिंग हो। अभिभावकों को स्कूल और शिक्षकों के नजदीक आना होगा। स्प्रिंग डेल कॉलेज की प्रिंसिपल रीता खन्ना ने शिक्षा का अधिकारी अधिनियम पर बात की। कहा कि आरटीई के तहत गरीब बच्चों को कान्वेंट स्कूलों में पढ़ाने की पहल अच्छी है लेकिन इसकी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। उनका कहना था कि रेयान की घटना के बाद सभी स्कूल प्रबंधन व प्रधानाचार्यों को अपराधी की नजर से देखा जा रहा है जो कि गलत है।
इससे पहले वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए बिशप यूजीन जोसफ ने कहा कि आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों की मानसिक स्थिति को हमें बेहतर ढंग से समझना होगा। इसके लिए शिक्षकों को अभिभावकों की भूमिका में आना होगा। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा की तकनीकी ही नहीं मानवीय मूल्य भी बेहद जरूरी है। स्वागत फादर सुसाई राज ने किया। संचालन अनीता पॉलीन डे व धन्यवाद ज्ञापन फादर हेनरी ने किया।