सफलता के पायदान पर मजबूती से पहला कदम रखने वाले मेधावियों को जब गोल्ड मेडल दिया गया तो उनके चेहरे पर सोने जैसी चमक दिखी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बीएचयू के दीक्षांत समारोह में प्रतिभाशाली छात्रों को मेडल मिले तो तालियों की गड़गड़ाहट ने उनका इस्तकबाल किया।
आईआईटी बीएचयू के पांचवें दीक्षांत समारोह में यूं तो 40 मेधावियों को गोल्ड मेडल, एक छात्रा को रजत मेडल और एक छात्र को मंच से पुरस्कृत किया जाना था लेकिन 40 गोल्ड मेडलिस्ट में से 31 मेधावी ही समारोह के साक्षी बने। शिष्ट यात्रा के बाद दीप प्रज्ज्वलन, मंगलाचरण और कुलगीत से दीक्षांत समारोह का औपचारिक आगाज हुआ। संचालक मंडल के अध्यक्ष ने समारोह के आरंभ की घोषणा की। निदेशक प्रो. राजीव संगल ने वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी।
समारोह में 1273 छात्रों को उपाधि प्रदान करने की घोषणा की गई। सभी को निदेशक ने धर्माचरण, अनुशासन की प्रतिज्ञा दिलाई। फिर इसके बाद मेधावियों को गोल्ड मेडल दिया गया। कुलसचिव डॉ. एसपी माथुर ने एक-एक कर मेधावियों को मंच पर आमंत्रित किया और मुख्य अतिथि आईआईटी मद्रास के प्रो. अशोक झुनझनुवाला, सोसाइटी ऑफ एजूकेशन, एक्शन एंड रिसर्च इन कम्यूनिटी हेल्थ (सर्च) के निदेशक डॉ. अभय बंग, बोर्ड ऑफ गवर्नर के चेयरमैन प्रो. जीसी त्रिपाठी द्वारा मेधावियों को गोल्ड मेडल से नवाजा गया।
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के शुभम वर्मा को सर्वाधिक पांच गोल्ड मेडल तथा एक रजत पदक मिला। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के अरमान गर्ग, मेकैनिकल इंजीनियरिंग के शुभम वर्मा और केमिकल इंजीनियरिंग के वैभव चौधरी को चार गोल्ड मेडल मिले। माइनिंग इंजीनियरिंग के संतोष कुमार को तीन मेडल मिले। समारेाह का संचालन प्रो. एसके शर्मा और धन्यवाद ज्ञापन डीन प्रो. जीवीएस शास्त्री ने किया। हालांकि सर्वाधिक पांच मेडल समेत आठ पुरस्कार से नवाजी जाने वाली इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की दीप्ति नथानी यादगार क्षण की साक्षी न बन सकीं।
दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि आईआईटी मद्रास के प्रो. अशोक झुनझुनवाला ने दीक्षांत भाषण में स्नातकों से तकनीकी ज्ञान के जरिए समाज की चुनौतियां दूर करने का आह्वान किया। कहा कि भारत में ऐसी कई चुनौतियां हैं जिसका तकनीकी समाधान बेहद जरूरी है।
बताया कि जब वे 1981 में भारत लौटे और आईआईटी मद्रास में अध्यापन शुरू किया तो घर में फोन लगवाना चाहते थे। इसके लिए आठ साल का इंतजार करना पड़ा तो सेमी कंडक्टर के मूल्य में वायरलेस फोन का ईजाद किया। टेलीकॉम इंजीनियर होने के बावजूद चेन्नई की बिजली समस्या को दूर करने के लिए काम किया। सोलर में डीसी पॉवर का इस्तेमाल कर इसमें भी सफलता पाई। दिसंबर में जब चेन्नई में बाढ़ आई और शहर बगैर बिजली के था, उस वक्त सिर्फ मेरे घर में चार दिनों तक बिजली रही।
सलाह दी कि पानी और स्वच्छता के लिए तकनीकी का विकास करें। गुणवत्ता की चुनौतियों का समाधान करें और देश को संपन्न, खुशहाल और शक्तिशाली बनाने में योगदान दें।
दूसरे अतिथि डॉ. अभय बंग ने मूल्यों की शिक्षा देते हुए नसीहत दी कि कभी अपनी जिंदगी को पैसों से मत आंकिए। क्योंकि यह सबसे बेवकूफी भरा समझौता होगा। बिल गेट्स के सामाजिक सरोकार के लिए आधी पूंजी दान करने को उदाहरण के रूप में रखा। कहा कि आप खुद के लिए नहीं बल्कि समाज के लिए भीड़ से खुद को अलग करिए। कहा कि देश में 10 करोड़ आदिवासियों की जनसंख्या है जो एक हजार साल पुरानी जिंदगी जी रहे हैं। हर साल 13 लाख बच्चों की मौत हो जाती है। उन्हें आपकी जरूरत है। कहा कि अपनी जिंदगी क्यों जी रहे हैं, इसका मकसद तलाशिए। जिंदगी कैसे जी जाए ये नहीं।