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Varanasi News: रेलवे पार्सल में 28 साल से खड़े हैं 28 दोपहिया वाहन

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उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल को 24.52 लाख रुपये हुआ किराया, इतने में मिल जाएगा चार पहिया वाहन
कैंट स्टेशन के पार्सल कार्यालय में कबाड़ हो चुके हैं दोपहिया वाहन


ललित शंकर पांडेय, माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। रेलवे पार्सल का नियम है कि दोपहिया वाहन यदि पार्सल कार्यालय में पहुंचा तो उसे छह घंटे के अंदर छुड़वाना होगा। अन्यथा 10 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से विलंब शुल्क लगता है। हालांकि 28 यात्रियों ने अपने 28 दोपहिया वाहनों को साल 1996 से कैंट के पार्सल कार्यालय से नहीं छुड़ाया है। लिहाजा उन वाहनों का पार्सल विलंब शुल्क 28 साल में इतना बढ़ गया कि उतने में चार पहिया वाहन खरीद लेंगे। 28 साल का किराया 24 लाख 52 हजार 800 रुपये हुआ है।
कबाड़ हो चुके 28 दोपहिया वाहनों की नीलामी भी होगी तो किराये की इतनी रकम नहीं निकल पाएगी। कैंट रेलवे स्टेशन के पार्सल कार्यालय में बुलेट, राजदूत, स्कूटर और बाइक समेत दोपहिया वाहन वर्ष 1996 से खड़े हैं। पार्सल आया, लेकिन उसे छुड़ाने के लिए वाहन स्वामी सामने नहीं आए। पार्सल कार्यालय कर्मियों को इंतजार रहा कि एक, दो और तीन माह बाद आएंगे लेकिन धीरे-धीरे दो दशक से अधिक 28 साल गुजर गए और वाहन स्वामियों का अता पता नहीं चला। इन गाड़ियों के कागजात नहीं होने के कारण उनके मालिकों तक पार्सल विभाग पहुंच नहीं सका। इसी चक्कर में इन वाहनों की नीलामी की प्रक्रिया भी अटकी रही।
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आरटीओ से एनओसी नहीं मिलने के कारण खड़े-खड़े वाहन अब कबाड़ हाे गए। विशेष आदेश पर यदि वाहनों की नीलामी होती भी है तो प्रत्येक वाहनों का दो से तीन हजार रुपये से अधिक दाम नहीं मिल पाएगा। ऐसे में रेलवे पार्सल को 28 साल में विलंब शुल्क के तहत 24 लाख 52 हजार 800 रुपये की चपत लगी है। पिछले दिनों कैंट स्टेशन के निरीक्षण पर पहुंचे रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार ने पार्सल कार्यालय में खड़े इन दोपहिया वाहनों को देखा तो उसकी जानकारी ली थी। मंडल रेल प्रबंधक लखनऊ समेत अन्य अधिकारियों को इन वाहनों को जल्द नीलामी कराने का आदेश दिया था। मुख्य पार्सल पर्यवेक्षक विनोद यादव के अनुसार 1996 से यह वाहन खड़े हैं।
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