वाराणसी। पापों के नाश और सुख-समृद्धि की कामना के लिए अगहन मास में होने वाली अंतरगृही यात्रा मंगलवार को मणिकर्णिका घाट से शुरू हुई। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर नंगे पांव 25 किमी की इस यात्रा की शुरू की। विभिन्न पड़ावों पर ठहर कर दर्शन-पूजन करने का सिलसिला जारी रहा। सिर पर गठरी और कंधे पर झोला लिए परिक्रमा पथ पर निकलीं महिलाएं व पुरुष भजन-कीर्तन भी करते रहे।
ज्ञानवापी में पंच विनायकों के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के मुक्ति मंडप में संकल्प लेकर मणिकर्णिका तीर्थ पर स्नान से परिक्रमा यात्रा आरंभ की। इस यात्रा के दौरान कई तीर्थों की परिक्रमा की गई। मणिकर्णिका चक्रपुष्करिणी तीर्थ पर स्नान और मणिकर्णिकेश्वर महादेव के दर्शन किए। हालांकि सोमवार की रात से ही अंतरगृही परिक्रमा यात्रा के लिए आस्थावानों का रेला उमड़ पड़ा था। मान्यता है कि सिद्धि विनायक के बाद कंबलेश्वर, अश्वतरेश्वर, वासुकीश्वर का दर्शन करते हुए रेला आगे बढ़ता है। इस दौरान काशी में अलग-अलग स्थानों पर स्थित 75 पौराणिक तीर्थों की परिक्रमा की जाती है। इसके बाद मुक्तिमंडप में ही पहुंचकर अंतरगृही परिक्रमा यात्रा पूरी होती है। इस परिक्रमा यात्रा से जन्म-जन्मांतर के मनसा, वाचा, कर्मणा से किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है। श्रद्धालुओं ने गोदौलिया, हरिश्चंद्र घाट, संकटमोचन, साकेतनगर, खोजवां, बड़ी पटिया, छोटी पटिया होते हुए मंडुवाडीह-लहरतारा से होते हुए चौकाघाट पर विश्राम किया। बुधवार की सुबह फिर से यात्रा की शुरुआत होगी। यहां से पुराना पुल, नक्खी घाट होते हुए सरायमोहना पहुंचकर वहां से वापस मणिकर्णिका घाट पर यात्रा का समापन होगा।