साइबर ठगी में गई लोगों की गाढ़ी कमाई का 25 करोड़ रुपये म्यूल खातों, डमी कंपनियों के खाते, पेमेंट ऐप्स, वॉलेट्स और ऑफशोर खातों में घूम रहे हैं। ये वो खाते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराधियों ने विभिन्न माध्यमों से किया और ठगी की रकम मंगवाए।
पुलिस ने साइबर अपराध पोर्टल 14 सी के माध्यम से फर्जी खातों को चिह्नित कर रकम को होल्ड कराया। अब पीड़ितों के पास ठगी की रकम को वापस पाने की उम्मीद है लेकिन कानूनी दांव पेंच में 12-18 महीने बीत जाने के बाद भी रुपये उन्हें नहीं मिल पाए। 800 से ज्यादा म्यूल खातों, 10,176 मोबाइल नंबर एवं 8,262 आईएमईआई नंबरों की जांच के बाद पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची और कार्रवाई की।
साइबर थाना पुलिस की जांच में सामने आए वाराणसी समेत 12 राज्यों में हुई ठगी की रकम को होल्ड कराया गया। 25 करोड़ रुपये को साइबर अपराधियों ने 5 से 15 लेयर में रुपये को इधर से उधर घुमाए थे। ठगी के 48 घंटे यानी गोल्डन ऑवर में शिकायत दर्ज होने पर इतनी बड़ी रकम को पुलिस होल्ड कराने में सफल रही। जबकि होल्ड रकम से दो गुनी रकम को साइबर ठगों ने ठिकाने लगाया।
एमआरएम मॉड्यूल से पा सकते हैं वापस
साइबर थाने की पुलिस के मुताबिक गृह मंत्रालय ने एनसीआरपी पोर्टल पर एमआरएम मॉड्यूल शुरू किया है। इस वेबसाइट पर जाकर पीड़ित जिसका एक लाख से कम रकम होल्ड या सीज है वह यहां मांगे गए आवेदन पर जाकर डिटेल्स भर सकता है। खासकर एक्नॉलेजमेंट नंबर जरूर भरें। शिकायत खाते सिंगल कंप्लेंट है तो बैंक पुलिस की एफिडेविट और रिपोर्ट के आधार पर उसे वापस दे सकता है। हालांकि 50 हजार से अधिक रकम के मामले में कोर्ट के आदेश की जरूरत पड़ सकती है।
एक साल में दर्ज हुईं 17 हजार शिकायतें
एनसीआरपी पर 365 दिनों में करीब 17 हजार साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हुई जबकि साइबर थाना व लोकल थाने पर 60-70 मामले हर महीने दर्ज होते हैं। 80 प्रतिशत मामलों में ठगी के रुपये पीड़ितों का साइबर ठगों ने निकाल लिया। न रकम मिली न ही साइबर ठग पकड़े गए।
होल्ड रकम मिलने में देरी की वजह और कानूनी दांव-पेंच
ठग चंद मिनटों में रकम को कई बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते हैं। ऐसे में प्रत्येक खाते का विवरण जुटाने और रकम को ट्रेस करने में समय लगता है। साइबर सेल की ओर से नोटिस भेजकर बैंक डेटा और स्टेटस रिपोर्ट मांगी जाती है जो देरी से मिलती हैं।
साइबर सेल पुलिस के अनुसार दूसरे राज्यों के बैंक खातों से जुड़े मामलों में पुलिस को अंतरराज्यीय समन्वय भी करना पड़ता है। इसके अलावा, बैंक या पुलिस होल्ड रकम सीधे पीड़ित को नहीं लौटा सकते। रकम वापस करने के लिए नियमानुसार न्यायालय का आदेश चाहिए। पीड़ित वकील के माध्यम से संबंधित मजिस्ट्रेट कोर्ट में आवेदन दाखिल करता है।
अदालत पुलिस और बैंक से रिपोर्ट मांगती है, ताकि रकम के वास्तविक मालिक और अन्य दावेदारों की स्थिति स्पष्ट हो सके। सत्यापन रिपोर्ट और बैंक की अनापत्ति मिलने के बाद अदालत रकम जारी करने का आदेश दे सकती है। जरूरत पड़ने पर पीड़ित से इंडेम्निटी बॉन्ड भी भरवाया जाता है।
अधिकारी बोले
खातों का सत्यापन, बैंक डेटा और स्टेटस रिपोर्ट साथ ही दूसरे प्रदेशों से समन्वय पत्राचार करने की प्रक्रिया पूरी कर जानकारी जुटाई जाती है। कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय आदेश के बाद ही होल्ड रकम रिलीज होती है। कानूनी प्रक्रिया का पूरा पालन होने के बाद ही रकम वापस मिलती है। -नृपेंद्र कुमार, एडीसीपी क्राइम