शहर के सभी जोन में अवैध निर्माण होते रहे। वीडीए के जोनल अधिकारियों ने केवल फाइलों का पेट भरा। खुद को सुरक्षित करने के लिए भी फाइलों में सारी कार्रवाई की गई क्योंकि यदि मामला खुले और पूछा जाए कि क्या एक्शन लिया तो पूरी फाइल पेश कर दी जाए। इसमें चालान भी काटे गए हैं। सीलिंग की डेट भी तय है। शहर के बीचोंबीच बड़ी बड़ी इमारतें तन गई।
गंगा, वरुणा और असि नदी के आसपास भी निर्माणों की बाढ़ आ गई। वीडीए केवल फाइलों में ही खेल करता रहा। आवासीय को भी यदि छोड़ दिया जाए तो इनमें आधे से ज्यादा निर्माण तो व्यावसायिक हैं। कई मामलों में बिल्डरों ने अवैध निर्माण करा दिए। यही कारण है भवन बनाने वालों ने बेसमेंट को भी बेच दिया था।
अपर मुख्य सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण की ओर से प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि अवैध निर्माणों को प्राथमिकता पर निस्तारित कराएं। बहुमंजिला भवनों जिनमें भवन निर्माण व विकास उपविधि के अनुसार स्ट्रक्चर व सेफ्टी की जांच कराएं। इन पर शासन के निर्देशानुसार निस्तारण भी कराया जाएगा। उन्होंने अधिक से अधिक नक्शा पास कराने पर भी जोर दिया है।
क्या बोले अधिकारी
पुराने और नए सभी अवैध निर्माण पर कार्रवाई की जा रही है। आम जनता से अपील है कि बगैर वीडीए से मानचित्र स्वीकृत कराए किसी प्रकार का निर्माण न कराएं। अन्यथा जांच में यदि मानचित्र के विपरीत निर्माण पाएगा जाएगा तो सील और ध्वस्तीकरण कराए जाएंगे। - पुलकित गर्ग, उपाध्यक्ष वीडीए