इस परियोजना की सबसे खास विशेषता यह होगी कि पूरी जलापूर्ति व्यवस्था को आधुनिक स्काडा (एससीएडीए) तकनीक से जोड़ा जाएगा। इस तकनीक की मदद से जल निगम के कंट्रोल रूम से ही जलापूर्ति व्यवस्था की रियल-टाइम निगरानी की जा सकेगी। अधिकारी पाइपलाइन में लीकेज, पानी के दबाव और आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रख सकेंगे। किसी भी तकनीकी गड़बड़ी या रिसाव की जानकारी तुरंत मिलने से उसका त्वरित समाधान किया जा सकेगा और पानी की बर्बादी पर भी प्रभावी नियंत्रण रहेगा।
जल निगम के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने बताया कि योजना के पूरा होने के बाद शहर के सभी वार्डों में जलापूर्ति व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक सुचारु और प्रभावी होगी। जिन इलाकों में पानी का दबाव कम रहता है, वहां भी लोगों को पर्याप्त मात्रा में पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजना को जल्द शुरू करने की तैयारी चल रही है और इसके लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। योजना के क्रियान्वयन के बाद शहर की पेयजल व्यवस्था में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।