वाराणसी। बीएचयू के भारत कला भवन में एक महीने तक चलने वाली कला प्रदर्शनी में महात्मा गांधी की जीवन गाथा देखने को मिलेगी। इसमें बापू के दांडी मार्च, नमक सत्याग्रह से लेकर रविंद्र नाथ टैगोर के साथ मुलाकात, उनके खड़ाऊं, चरखे पर काम आदि को कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से दर्शाया है। शुक्रवार को कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने प्रदर्शनी का उद्घाटन कर कलाकृतियों का अवलोकन किया।
प्रवासी भारतीय सम्मेलन और महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ पर लगाई गई इस प्रदर्शनी को देखने के लिए प्रवासी भारतीयों को भी आमंत्रित किया गया है। दिल्ली की प्रोग्रसिव आर्ट गैलरी की ओर से लगी प्रदर्शनी में 75 कलाकारों की कलाकृतियां शामिल हैं। इसमें नंदलाल बोस ने गांधी मार्च, जामिनी रॉय ने रविंद्रनाथ टैगोर के साथ बातचीत, राम कुमार ने तिरंगे के बीच गांधी की कलाकृतियां बनाई हैं। युसुफ ने चंपारण सत्याग्रह का दृश्य तो निकिता देव ने चरखे के साथ बापू और अर्चना सिन्हा ने कस्तूरबा का साथ गांधी का हाथ दर्शाया है। भारत कला भवन के निदेशक प्रो. अजय सिंह और प्रोगेसिव आर्ट गैलरी के संचालक आरएन सिंह ने बताया कि पहली बार इस तरह की कला प्रदर्शनी लग रही है जिसमें कलाकारों ने अलग-अलग दृष्टि से महात्मा गांधी की जीवनी का दृश्य दिखाया है। प्रवासियों के मौलिक अधिकारों की आवाज सबसे पहले गांधी जी ने ही उठाई थी।
गुलाब के फूल से बताई बापू की अभिव्यक्ति
दिल्ली से आए जाने माने फोटोग्राफर नरेश शर्मा की कलाकृति प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र बनी है। इसमें उन्होंने बापू के चश्मे का चित्र बनाते हुए एक तरफ गुलाब के खिले फूलों की पत्तियां दिखाई हैं और दूसरी ओर मुरझाई पत्तियां। उन्होंने बताने की कोशिश की है कि बापू के विचारों को मानने वाले आज भी खुश है जबकि उसकी अनदेखी करने वाले मुरझाए फूलों की तरह हैं।