ज्ञानपुर/गोपीगंज। झमाझम बारिश से धान की रोपाई कर चुके किसानों को अब यूरिया के लिए जूझना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को गिनी-चुनी समितियों पर पहुंची खाद के लिए किसानों में मारामारी की नौबत रही। घंटों लाइन में लगाने के बाद किसी को यूरिया मिली तो कोई खाली हाथ लौट गया।
करीब एक माह विंलब से आए मानसून 11 दिनों से मेहरबान है। किसान युद्ध स्तर पर धान की रोपाई कर चुके हैं। एक सप्ताह का समय गुजरने के बाद धान में यूरिया के छिड़काव को लेकर परेशान हो गए हैं। सहकारी समितियों पर यूरिया न मिलने से किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को क्रय विक्रय सहकारी समिति पड़ाव गोपीगंज में छह सौ बोरी यूरिया आई जो कुछ ही घंटे में खत्म हो गई। जिससे केंद्र पर यूरिया के लिए सुबह से लेकर दोपहर तक लोगों की लंबी लाइन लगी रही। इस दौरान कई लोग बिना यूरिया के ही लौटे। कमोबेश यही स्थिति जिले के दस समितियों की रही। जहां खाद तो आई लेकिन वहां किसानों की संख्या अधिक होने से सभी को नहीं मिल सकी। एआर को-आपरेटिव रविंद्र कुमार मिश्र ने कहा कि अब समितियों को जीएसटी से जोड़ा जा रहा है। जिले की 52 समितियों में मात्र 37 ही सक्रिय हैं। इसमें 10 समितियों ने जीएसटी से जुड़ने के अलावा साफ-सुथरा हिसाब रखा है। उन समितियों पर खाद भेज दी गई है। जो समितियां अब तक जीएसटी से नहीं जुड़ सकी हैं, वहां खाद नहीं आ पाई। उन्होंने कहा कि जिले में एक हजार एमटी यूरिया मौजूद है जबकि 3500 एमटी का लक्ष्य है। दो रैक यूरिया के लिए मांग की गई है।