वाराणसी। जंगमबाड़ी निवासी व्यापारी अरविंद तिवारी को नौ जून को लखनऊ जेल से पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने ही कॉल कर रंगदारी मांगी थी। दशाश्वमेध पुलिस ने लखनऊ के गोसाईगंज क्षेत्र के बिलखुंभा निवासी गायत्री के करीबी भीम सिंह रावत को गिरफ्तार कर शनिवार को इसका खुलासा किया। मामले में पुलिस को दो और आरोपियों की तलाश है, इसके लिए एक टीम फिर लखनऊ रवाना की गई है। जिस मोबाइल और सिम से अरविंद को कॉल की गई थी, उसे नष्ट करने का आरोप भीम पर है। पुलिस ने सिम के टुकड़ों की बरामदगी का दावा किया है।
सोनभद्र जिले में वर्ष 2014 में बालू खनन का टेंडर अरविंद तिवारी की फर्म को मिला था। अरविंद के अनुसार नौ जून को उन्हें कॉल कर गायत्री प्रसाद प्रजापति ने कहा कि 2014 वाले खनन के टेंडर का कमीशन लखनऊ जेल आकर दे जाओ। कमीशन न देने पर परिणाम भुगतने को तैयार रहना। मामले को लेकर अरविंद की तहरीर पर 30 जून को दशाश्वमेध थाने में गायत्री प्रसाद के खिलाफ रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज किया गया।
एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि सर्विलांस की मदद से की गई तफ्तीश में सामने आया कि कॉल लखनऊ जेल से आई थी। उस नंबर से जिन अन्य लोगों से बातचीत हुई थी, उनसे पूछताछ की गई तो पता लगा कि उसे गायत्री प्रसाद प्रजापति उपयोग करते हैं। इसी बीच सर्विलांस की मदद से भीम सिंह रावत को चिह्नित किया गया। उसकी उस नंबर पर अक्सर बातचीत होती थी। वो पूर्व मंत्री के कार्यकाल के दौरान उनका हिसाब-किताब रखता था। कोचिंग चलाने के साथ ही अब भी वह पूर्व मंत्री के संपर्क में था। भीम से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि तीन जुलाई को वो लखनऊ जेल गया था और गायत्री से मिला था। जेल के बंदीरक्षकों की मदद से वो धमकी में प्रयुक्त मोबाइल-सिम बाहर लाया और नष्ट कर दिया। मोबाइल तो फेंक दिया था लेकिन टूटा हुआ सिम घर पर ही पड़ा रह गया था। भीम के पास से एक डायरी भी बरामद हुई है जिसमें कई लोगों को नाम और नंबर दर्ज हैं। इन लोगों में कुछ वो लोग भी हैं जिनकी बातचीत धमकी में प्रयुक्त नंबर से हुई है। इस मामले में साजिशकर्ता के तौर पर लखनऊ के ही दो और लोग चिह्नित हुए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए एक पुलिस टीम लखनऊ रवाना की गई है। भीम को जेल भेज दिया गया है।