वाराणसी। उप्र सेतु निगम भले ही दावा कर रहा है कि हादसे के समय निर्माणाधीन फ्लाईओवर पर काम नहीं हो रहा है लेकिन वहां काम चलने के साक्ष्य मौजूद हैं। हादसे के दूसरे दिन घटनास्थल पर पहुंचे इंजीनियरिंग के जानकारों की मानें तो जैक और बेयरिंग में तालमेल नहीं होने से बीम गिरी हैं। बीम गिरने वाले स्थल पर गैस कटर मशीन की पाइप पड़ी है। पिलर के ऊपर जैक और हैंडल पड़े हैं। इसका मतलब है कि वहां कुछ हो रहा था। जिस तरह से बीम को रखा गया है, वह असंतुलन के बगैर नहीं गिर सकता है।
घटना स्थल के पास रेलवे कॉलोनी निवासी विश्वास चतुर्वेदी ने बताया कि घटना के पहले से पिलर पर मजदूर काम कर रहे थे। पहले पीछे वाला बीम गिरा, इसके बाद आगे वाला बीम गाडि़यों पर गिरा। सिगरा निवासी पीडब्ल्यूडी के रिटायर्ड इंजीनियर विनोद शुक्ला ने बताया कि पीछे वाला बीम बीच में टूटा है, जबकि आगे वाले बीम में कई जगहों पर दरार पड़ गई है। लग रहा है कि जैक से बीम को बेयरिंग में फिट किया जा रहा था। जैक घुमाने के दौरान एक तरफ का हिस्सा अधिक उठ गया और बीम का झुकाव जिस ओर था, उधर गुरुत्वाकर्षण के चलते बीम झुकी और नीचे गिर पड़ी। पीछे वाली बीम से आगे वाली बीम को धक्का लगा और वह नीचे वाहनों पर गिर पड़ी।
सिंचाई विभाग के रिटायर्ड इंजीनियर एसके सिंह ने बताया कि वहां का दृश्य देखने से लग रहा है, वहां काम चल रहा था। फरवरी में रखी गई बीम मार्च-अप्रैल में नहीं गिरी। इसका मई में गिरना आश्चर्य की बात है।