ज्ञानपुर/चौरी। कुपोषण दूर करने की मुहिम ऐसे तो सफल नहीं हो सकती। जिले के सीमावर्ती आंगनवाड़ी केंद्रों की हालत बदहाली और कर्मचारियों की मनमानी के कारण ग्रामीणों का कुछ ऐसा ही मानना है। इन केंद्रों के न खुलने का समय है न बंद होने का। यहां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं कब आती-जाती हैं, ग्रामीणों को पता ही नहीं चल पाता। बच्चों की जांच, टीकाकरण भी कभी-कभी होता है।
आंगनवाड़ी केंद्रों का हाल जानने के लिए बुधवार को सुबह 10 से 11 बजे तक अमर उजाला की टीम चौरी के सीमावर्ती वेदमनपुर, कपालडीह, दरूनहा, लठियां, बरदहां, मानिकपुर, गोहिलांव, दलापुर गांव के आंगनवाड़ी केंद्रो पर पहुंची। चार गांव के आंगनवाड़ी केंद्र नहीं खुले थे, जो खुले भी थे वहां बच्चों की संख्या नाममात्र की ही रही। अभिभावकों से बातचीत में पता चला कि यहां कोई जांच के लिए नहीं आता। न केंद्र खुलने का कोई समय निर्धारित है न बंद होने का। केंद्र पर पोषाहार कभी-कभी ही बच्चों को दिया जाता है। जिससे सरकार की यह योजना धरातल पर फलीभूत नहीं हो पा रही है। बताते चलें कि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जिले के छह ब्लॉकों में करीब 1400 आंगनवाड़ी केंद्र संचालित है। जिन पर हर साल सरकार करोड़ों रुपये पोषाहार समेत अन्य योजनाओं में खर्च करती है। प्रभारी डीपीओ अमृता सिंह ने कहा कि केंद्रों के संचालन को लेकर सभी की जिम्मेदारी तय की जा रही है। जांच में केंद्र बंद मिले या अन्य खामियां मिलने पर संबंधित पर कार्रवाई होगी।