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डेढ़ हजार आबादी की पहचान का संकट

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ज्ञानपुर। जिले में एक बस्ती ऐसी है, जिसका राजस्व अभिलेख में कोई अस्तित्व ही नहीं है। इसका नाम ज्ञानपुर और औराई ब्लॉक की सीमा के मध्य और नगर पालिका की सीमा से सटी ककराही चौबान बस्ती है। यहां करीब डेढ़ हजार की आबादी है, जो अपने पहचान के संकट से जूट रही है। 2014 में पंचायत परिसीमन के बाद माधवरामपुर गांव से कटी इस बस्ती के लोगों के पास न राशन कार्ड हैं न आधार कार्ड। ये सरकारी योजनाओं से भी वंचित हैं।
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2015 में स्थानीय चुनाव से पहले ग्राम पंचायतों का परिसीमन किया गया था। परिसीमन में 80 ग्राम पंचायतें बढ़ गई थीं। इस तरह 481 से बढ़ कर कुल कुल 561 ग्राम पंचायतें जिले में हो गईं। परिसीमन के समय कई गांव इस तरीके से कटे और जुड़े कि वहां के लोगों की मुश्किलें आज भी बनीं हुई हैं। औराई और ज्ञानपुर ब्लॉक के अलावा नगर पालिका गोपीगंज की सीमा पर स्थित ककराही चौबान बस्ती आजादी के बाद से माधवरामपुर गांव का हिस्सा थी। वर्ष 2014 में हुए में हुए परिसीमन में कटकर गांव से अलग हो गई। शुरुआत में ग्रामीणों ने हो-हल्ला मचाया लेकिन समय के साथ वे शांत हो गए। ग्रामीण रविंद्र यादव ने कहा कि हमारी हालत बंजारों जैसी हो गई है। हमसे हमारी पहचान छीन ली गई है। न हमारे पास कोई अधिकार हैं न सरकारी योजनाओं का कोई लाभ मिल रहा। ऐसी हालत में गांव विकास के लिए तरस रहा है। माधवरामपुर ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि सतीश पाठक का कहना है कि ककराही चौबान बस्ती जौहरपुर गांव से जुड़ी है, जबकि जौहरपुर प्रधान ने कहा कि ककराही उनके गांव में नहीं आता। दोनों गांवों के चक्कर में ककराही की 1500 की आबादी पिस रही है। यहां के बाशिंदों का न तो राशन कार्ड बन रहा, न आधार कार्ड। किसी चुनाव में ये वोट भी नहीं डाल सकते।
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