वाराणसी। जिले में दौड़ रहे तकरीबन तीन लाख वाहन जहरीला धुआं उगल रहे हैं। ये ऐसे वाहन हैं जिनके पास प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाणपत्र नहीं है। इन वाहनों से निकलने वाला धुआं हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। संभागीय परिवहन कार्यालय में 9 लाख 52 हजार 846 वाहन पंजीकृत हैं। इनमें तीन लाख से अधिक वाहन ऐसे हैं जिनके पास प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाणपत्र नहीं है। पंजीकृत वाहनों में 65 हजार 810 व्यावसायिक हैं।
नियमत: इन सभी वाहनों को हर छह महीने बाद प्रदूषण नियंत्रण जांच केंद्र से प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र लेना चाहिए। पर न कोई जांच कराता है और न जिम्मेदारों को जांच करने की फिक्र है। वाहनों के धुएं से होने वाले प्रदूषण की जांच के लिए जिले में कुल नौ जांच केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों से मिले इनपुट के मुताबिक जिले की सड़कों पर दौड़ रहे 50 फीसदी से ज्यादा वाहन प्रदूषण की जांच कराए बगैर ही शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें से करीब एक लाख वाहन तो ऐसे हैं जिन्होंने एक बार के बाद दोबारा प्रदूषण की जांच कराई ही नहीं। विडंबना यह कि इन वाहन स्वामियों को परिवहन विभाग की ओर से कोई नोटिस तक जारी नहीं किया गया।
शहर की आबो-हवा में जहर घोलने वाले इन वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग और यातायात पुलिस कार्रवाई करने तक की जहमत नहीं उठाते। वाहनों की चेकिंग तो की जाती है लेकिन प्रदूषण की जांच नहीं की जाती। दिल्ली से लेकर वाराणसी तक लोग प्रदूषण की गंभीर समस्या से घिरे हुए हैं लेकिन इसकी रोकथाम के कोई ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
बीएस-4 वाहनों में प्रदूषण जांच की आवश्यकता नहीं
परिवहन अधिकारियों के मुताबिक बीएस-4 वाहनों में करीब एक साल तक प्रदूषण जांच की आवश्यकता नहीं है। इनके अलावा अन्य वाहनों को हर छह महीने पर प्र्रदूषण जांच की आवश्यकता होती है।
इन नौ केंद्रों पर करा सकते हैं वाहनों के प्रदूषण की जांच
परिवहन विभाग ने जिले में नौ केंद्रों को प्रदूषण की जांच का लाइसेंस जारी किया है। इनमें मे. योर लाइफ सेफ एंड केयरिंग सोसाइटी भीटी बाईपास, मो. हसीब सिराजुद्दीन आटो वर्क्स कैंट, सेंच्युरी फ्यूल अकथा, चेतना वेलफेयर सोसाइटी सेंट्रल जेल रोड, ऑटो केयर सोसइटी नदेसर, सांई समाज कल्याण सेवा समिति टकटकपुर, ऑटो केयर सोसाइटी न्यू कालोनी लच्छीपुरा, बाबा पर्यावरण संस्थान गिलट बाजार, नारायण सेवा समिति वरुणा पुल शामिल हैं।
जेब गरम करने का जरिया बनी जांच
अमूमन परिवहन विभाग और यातायात पुलिस वाहनों से होने वाले प्रदूषण की जांच ही नहीं करते। अगर कभी जांच का ख्याल आ भी गया तो उस दिन ये जांच महज जेब गरम करने का जरिया बनकर रह जाती है। यूं तो प्रदूषण नियंत्रण का प्रपत्र न होने पर परिवहन विभाग और यातायात पुलिस वाहन स्वामी से एक हजार रुपये जुर्माना वसूल सकती है। लेकिन होता यह है कि भले ही गाड़ी जहरीला धुआं उगल रही हो, जहां ‘लेन-देन’ हुआ सारी खामियां खूबियों में बदल जाती हैं। इसीलिए वाहन स्वामियों को भी एक हजार रुपये जुर्माने का कोई डर नहीं।
आंकड़े एक नजर में (इसे अंकों में ही अलग से उभारें)
9,52,846 वाहन परिवहन कार्यालय में हैं पंजीकृत
65,810 वाहन हैं व्यावसायिक
80,874 वाहन हैं चार पहिया
18,779 वाहन हैं तीन पहिया
7,77,794 वाहन हैं दो पहिया
2.70 लाख वाहन हैं डीजल चालित
6.30 लाख वाहन हैं पेट्रोल चालित
40 हजार बाहरी वाहन रोजाना शहर से होकर गुजरते हैं