वाराणसी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने कहा कि लार्ड मैकाले की शिक्षा नीति में बदलाव की जरूरत है। हम जो शिक्षा बच्चाें को दें वो न सिर्फ रोजगार परक हो बल्कि संस्कार परक भी हो। महात्मा गांधी के विचारों पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा ऐसी हो जो मस्तिष्क को ज्ञान, हृदय को भाव-करुणा और हाथ को काम दे। हमारी शिक्षा विकासोन्मुख होने के साथ संस्कृति की धरातल पर जमी होनी चाहिए। हमारी कोशिश है कि नई शिक्षा नीति में इन सभी का समन्वय हो।
बीएचयू ट्रामा सेंटर में आयोजित इंडियन कॉलेज ऑफ एनेस्थिशियोलॉजिस्ट के दीक्षांत समारोह में आए डॉ. सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि देश के बीस विश्वविद्यालयों को विश्व स्तरीय शैक्षणिक संस्थान बनाने की कवायद की जा रही है। सप्ताह भर पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी घोषणा की है। इन बीस विश्वविद्यालयों में दस विश्वविद्यालय सरकारी होंगे और दस प्राइवेट। इन्हें विश्व स्तरीय शैक्षणिक संस्थान बनाने के लिए ‘ज्ञान’ यानी कि ग्लोबल इनिशिएटिव एकेडमिक नेटवर्किंग’ प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत इन विश्वविद्यालयों में दो सौ विदेशी प्रोफेसरों को आमंत्रित किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार फंड उपलब्ध कराएगी।