वाराणसी। बीएचयू लॉ फैकल्टी में आयोजित पुरातन छात्र समागम में शामिल पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी ने कहा कि फ्री लीगल एड को अगर बढ़ावा मिले तो न्यायालयों में पड़ने वाले केस के बोझ को कम किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों खासकर कि लॉ स्कूल में क्लिनिकल लीगल एजूकेशन प्रोग्राम को बढ़ावा मिलना चाहिए। इससे कोर्ट में केस का दबाव तो कम होगा ही साथ ही गरीबों को भी न्याय मिलेगा।
पुरातन छात्र समागम में शामिल बिहार के मुख्य सूचना आयोग ओमप्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि अब भी यहां गरीबों को न्यायालयों से न्याय नहीं मिल पा रहा है। अदालतों में करोड़ों केस लंबित हैं। जो नि:शुल्क विधिक सहायता के लिए कोर्ट में समितियां बनी हैं, वो कागजों पर ज्यादा है। उससे जरूरतमंदों को मदद नहीं मिल रही है। इसके लिए सरकार को पहल करनी चाहिए और बीएचयू को आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि मैं उस वक्त यहां का छात्र रहा जब देश में इमरजेंसी लगी थी।
1971 बैच के प्रो. डीके श्रीवास्तव ने कहा कि हमारे यहां लीगल सिस्टम परफेक्ट हैं, बस इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। कोर्ट की संख्या कम हैं। एक-एक जज पर पांच-पांच हजार केस का दबाव है। ऐसे में सभी पुरातन छात्रों को एक-एक गांव गोद लेकर राजस्व, सिविल और क्राइम के मामलों को सुलह समझौते से सुलझाया जाए। 85 साल की उम्र में भी लॉ स्कूल में अपनी सेवा दे रहे पूर्व संकाय प्रमुख प्रो. एमसी बिजावत ने भी अपने विचार रखे। पूर्व संकाय प्रमुख प्रो. बीसी निर्मल, प्रो. जीपी वर्मा, प्रदीप राय, शर्मिष्ठा शर्मा आदि ने अपने कालेज के पुराने दिनों को साझा किया। पुरातन छात्र समागम में करीब 20 से अधिक न्यायाधीश, 50 से अधिक अधिवक्ता, लीगल फर्म से जुड़े लोग शामिल हुए। अध्यक्षता संकाय प्रमुख प्रो. डीके शर्मा ने की। संयोजन एडीजे कानपुर अरविंद कुमार मिश्रा व प्रो. एसके गुप्ता का रहा।