वाराणसी। शहर में हर दिन लगने वाले जाम की समस्या से गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी जूझना पड़ा। सीएम का काफिला जाम में फंसा देख सुरक्षाकर्मी वाहनों से नीचे उतरे और रास्ता खाली कराया। तब जाकर मुख्यमंत्री का काफिला आगे बढ़ पाया।
संकटमोचन मंदिर और गढ़वा घाट आश्रम में दर्शन-पूजन करने के बाद मुख्यमंत्री शहर लौट रहे थे। इस दौरान भेलूपुर स्थित जल संस्थान से कमच्छा पॉवर हाउस तक वाहनों की कतार लगी हुई थी। वार्निंग वैन का सायरन बजने के बाद भी जब रास्ता खाली नहीं हुआ तो काफिले के साथ चल रहे सुरक्षाकर्मियों के हाथपांव फूल गए। वह तुरंत वाहनों से नीचे उतरे और रास्ता खुलवाना शुरू किया।
मुख्यमंत्री से मिलने चौबेपुर के उमरहा गांव निवासी पप्पू गुप्ता की बेटी गुड़िया और उसकी पत्नी ऊषा गुप्ता सर्किट हाउस पहुंची। उनका कहना था कि उनकी जमीन सड़क चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहीत की गई, लेकिन मुआवजा का निर्धारण सही तरीके से नहीं किया गया। वह मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंप कर न्याय की गुहार लगाना चाहती है। पुलिसकर्मियों ने दोनों को वापस लौटने के लिए समझाया, लेकिन जब वे नहीं मानी तो उन्हेें हिरासत में लेकर कैंट थाने भेज दिया। देर शाम परिजनों के आने पर दोनों को उनके सुपुर्द कर दिया गया।
नियम को ताक पर रखकर निजी विद्यालयों द्वारा मनमानी फीस वृद्धि के विरोध में अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री से मिला। सेंट्रल बार अध्यक्ष शिवपूजन सिंह गौतम और महामंत्री बृजेश मिश्र के हस्ताक्षरयुक्त छह सूत्रीय ज्ञापन को अधिवक्ता विनोद सिंह भैया, रंजन मिश्र, नागेंद्र सिंह, सूर्यभान सिंह ने मुख्यमंत्री को सौंपा। अधिवक्ताओं के अनुसार, मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि जांच करा कर मामले में कठोर कार्रवाई कराई जाएगी। कई अन्य अधिवक्ता भी मुख्यमंत्री से मुलाकात करने सर्किट हाउस पहुंचे थे, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण उन्हें बाहर ही रुकना पड़ा।