वाराणसी। प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन (एमडीएम) में लगातार मिल रही शिकायत और गड़बड़ी पर नकेल कसने के लिए शासन ने स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) को ट्रेंड करने का निर्णय लिया है। ताकि बच्चों का निवाला गटकने वालों पर शिकंजा कसा जा सके। इसके लिए जल्द ही जिले भर में संचालित विद्यालयों में गठित एसएमसी को ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें बताया जाएगा कि कैसे अपनी निगरानी में एमडीएम योजना को रखकर इसके वितरण में पारदर्शिता लाई जा सकती है।
जिले भर में 1014 प्राइमरी और 354 पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इन स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन की निगरानी के लिए आठ से दस सदस्यीय स्कूल मैनेजमेंट कमेटी होती है जिसमें स्कूल के प्रधानाध्यापक से लेकर शिक्षक, लेखपाल, सेक्रेटरी, ग्राम प्रधान, एएनएम और बच्चों के अभिभावक शामिल होते हैं। इनमें गड़बड़ी मिलने पर अभिभावकों को शिकायत के अधिकार दिए गए हैं, लेकिन जानकारी के आभाव में विद्यालय के शिक्षक, प्रधानाध्यापक से मिलकर इसका फायदा ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी मिलकर उठाते हैं और बच्चों के भोजन में खेल करते हैं। इसी गड़बड़ी और मनमानी को रोकने के लिए प्रदेश भर के बेसिक स्कूलों में गठित कमेटियों के सदस्यों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। एमडीएम के जिला समन्वयक जेपी सिंह ने बताया कि जल्द ही समितियों के सदस्यों को इसके लिए जागरूक किया जाएगा ताकि एमडीएम में हो रही गड़बड़ियों पर अंकुश लगाया जा सके।