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सुखपाल पर विराजे श्री महाप्रभु, गूंजे जयकारे0

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वाराणसी। पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य के 541वें प्राकट्य महोत्सव का आयोजन धूमधाम से किया। प्राकट्योत्सव पर मुकुंदगोपाल सेवा संस्थान की ओर से प्राकट्य दिवस महोत्सव पर शोभायात्रा का आयोजन किया गया। श्रीमहाप्रभु की शोभायात्रा षष्ठपीठ गोपाल मंदिर के प्रांगण से धूमधाम से निकली। शोभायात्रा सिद्धमाता फाटक, सोराकुआं, चौखंभा होते हुए गोपाललालजी के फाटक से मंदिर में प्रवेश की। शोभायात्रा में षष्ठपीठाधीश्वर श्री श्याममनोहर महाराज, प्रियेंदु बाबा साहब ने यात्रा का नेतृत्व किया।
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शोभायात्रा में श्री महाप्रभु की दवि को सुखपाल में विराजित कर चार कहार कंधे पर लेकर व स्थानीय श्रद्धालु, वैष्णवजन भजन की धुन पर झूमते-नाचते गाते चल रहे थे। शहरवासियों ने पुष्पवर्षा की तथा पूरा मार्ग गिरिराज धरण की जय, आज के आनंद की जय के जयकारे लगाकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। शोभायात्रा के आगे कीर्तन मंडली भजन गाते हुए और महिलाएं सिर पर कलश लेकर चल रही थीं। शोभायात्रा का जगह-जगह वैष्णवों एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा स्वागत किया गया। गोपाल मंदिर में शोभायात्रा पहुंचने पर दिनेश जोशी ने पुण्यवाचन कर स्वागत किया। इसके उपरांत श्री महाप्रभु की छवि सुखपाल से सभामंडप में स्थापित कराया। इसके पश्चात महाप्रभु का पंचोपचार पूजन किया गया। सभा के कार्यक्रम का शुभारंभ बधाई कीर्तन से हुआ। गोपीवल्लभ पाठक ने वैदिक मंगलाचरण किया एवं गुर्जर छात्र सभा के बटुकों ने पौराणिक मंगलाचरण किया। इस अवसर पर वल्लभ पाठक, व्रजवल्लभ, अरुण पारीख, हरीदास पारीख आदि मौजूद रहे। वहीं दूसरी तरफ शुद्धाद्वैज जप यज्ञ समिति की ओर से श्री वल्लभगीता श्रीकृष्ण भवन से शोभायात्रा निकाली गई।
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