भदोही। सीबीएसई और आईसीएसई की परीक्षाएं समाप्त होने के बाद अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों नए सत्र में प्रवेश की तैयारियां शुरू हो गई हैं। एडमीशन फीस, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूलने की योजनाबद्ध तैयारी हो रही है। वहीं, बच्चों के दाखिले के नाम पर जेब ढीली होने की चिंता और स्कूलों की मनमानी पर रोक नहीं लगने से अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है।
जनपद में गोपीगंज, भदोही, ज्ञानपुर, सुरियावां, नई बाजार आदि में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का जाल फैला हुआ है। ज्यादातर स्कूलों में होम एग्जाम खत्म होने वाले हैं और नए सत्र में दाखिले की तैयारियां शुरू हो गई हैं। दूसरी ओर हर वर्ष फीस बढ़ने से अभिभावक परेशान हैं। फीस वृद्धि के खिलाफ अभियान चला रहे छात्र नेता अखिलेश प्रकाश पाल ने कहा कि अभिभावक अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में अपने बच्चों की पढ़ाई के खर्चों तले दबकर रह गए हैं। फीस को अलग कर दें तो केवल किताब-कापियां, ड्रेस, जूते, मोजे आदि पर आठ से 12 हजार रुपये तक खर्च करना होगा। प्रशासन को चाहिए कि फीस वृद्धि पर रोक लगाने के साथ किताब-कापियां अपने यहां से खरीदने को बाध्य करने वाले विद्यालयों पर कार्रवाई करे।
मथुरापुर के रामचंद्र यादव का कहना है कि हर कोई अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ाना चाहता है। स्कूल प्रबंधन इसका भरपूर लाभ उठाते हैं। ज्यादातर स्कूल हर वर्ष फीस बढ़ाने के साथ पुस्तकें बदल कर मोटी कमाई करते हैं। इसके अलावा एडमीशन फीस, ट्यूशन फीस, डवलपमेंट चार्ज, कंप्यूटर फीस आदि के नाम पर भी अभिभावकों से वसूली की जाती है।
भदोही तहसील बार के अध्यक्ष सूर्य प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि निजी स्कूल महंगी किताबें और यूनिफार्म तय दुकानों से खरीदने को मजबूर करते हैं। सरकार एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाने पर जोर देती है, लेकिन विद्यालय महंगी किताबें खरीदवाने का बहाना बना लेते हैं। विक्की यादव ने कहते हैं कि कई विद्यालय कंप्यूटर कक्षा के नाम पर अलग से फीस तो लेते हैं, जबकि बच्चों को कंप्यूटर सिखाया ही नहीं जाता।