वाराणसी। काशी आर्य समाज की ओर से बुधवार को बुलानाला स्थित कार्यालय में स्वामी दयानंद काशी शास्त्रार्थ का 148वां स्मृति दिवस समारोह मनाया गया। इस मौके पर हुई संगोष्ठी के मुख्य अतिथि आर्य नेता डा. धीरज सिंह ने कहा कि स्वामी ने शास्त्रार्थ, व्याख्यान व विमर्श के जरिए धार्मिक संप्रदायों में व्याप्त अंध विश्वास, पाखंड के खिलाफ शंखनाद किया। धर्माचार्यों और जिज्ञासुओं को वेदों की ओर लौटने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में आर्य प्रतिनिधि सभा के उप प्रधान बेचन सिंह ने कहा कि स्वामी दयानंद ने देश में धार्मिक सांस्कृतिक जागरण की नींव रखी। प्रमुख वक्ता डा. जय प्रकाश भारती ने कहा कि स्वामी के शास्त्रार्थ आंदोलन का परिणाम रहा कि विभिन्न संप्रदायों के धर्माचार्य अपने धर्म ग्रंथों के स्वाध्याय में विशेष प्रवृत्त हुए। व्याख्यानों में सुधार लाए। रमाशंकर आर्य ने कहा कि स्वामी ने अपने वेदों के भाष्य से वेद ज्ञान का मर्म बताकर भ्रम का निवारण किया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक यज्ञ से हुई। मोतीलाल और रमेश ने भजन प्रस्तुत किया। अध्यक्षता श्रीनाथ सिंह पटेल ने की। संचालन प्रकाश नारायण और धन्यवाद ज्ञापन विवेक सिंह ने किया। इस मौके पर पूर्व पार्षद लीलाराम सचदेवा, प्रधान प्रकाश नारायण, राजाराम आदि ने अपने विचार रखे।