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वो शहीद जिसने अपनी कंपनियों के साथ दी थी शहादत, उनकी ये प्रतिमा अब कुछ कह रही है

Mon, 03 Feb 2020 08:26 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, मऊ
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रतनपुरा ब्लॉक परिसर में उपेक्षित पड़ी शहीद की मूर्ति। - फोटो : अमर उजाला।
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शहीद सूर्यबली सिंह ने चीन के साथ 21 नवंबर 1962 के युद्ध में बार्डर की रक्षा करते हुए अपनी कंपनी के सभी साथियों के साथ शहादत दी थी लेकिन, भाजपा सरकार अब इन शहीदों को लेकर कितनी चिंतित है, इसका उदाहरण मऊ जिले के रतनपुरा ब्लॉक मुख्यालय पर देखा जा सकता है। कई सालों से शहीद को समुचित सम्मान नहीं मिल पा रहा है। जिला मुख्यालय की बात तो दूर उनके ब्लॉक में ही वर्षों से शहीद की प्रतिमा परिसर में उपेक्षित मंदिर के पीछे फेंकी हुई है। जबकि, शहीद की प्रतिमा को पूर्व में भूतर्पूव सैनिकों ने अपने स्तर से निर्मित कराया था।

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रतनपुरा ब्लॉक क्षेत्र के मखना निवासी सूर्यबली सिंह पुत्र स्वर्गीय रामजी सिंह 1958 में सेना में भर्ती हुए थे। सूर्यबली सिंह की तैनाती अरुणांचल प्रदेश में तोपची के पद पर हुई थी। भारत-चीन के युद्ध में 21 नवंबर 1962 को चीन की सीमा पर ध्वाग में दुश्मन सेना का मुकाबला कर रहे थे। इसी दौरान दुश्मन सेना के हमले में पूरी कंपनी के जवानों के साथ बार्डर की रक्षा करते हुए सूर्यबली सिंह ने अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया।

शहीद सूर्यबली सिंह की शादी 1959 में बलिया जनपद के नगरा थानांतर्गत वीर चड़हरा गांव में कुंती सिंह के साथ हुई थी। शादी को चार दिन ही बीते थे कि सेना से बुलावा आ गया। चार दिन पहले ही ब्याह कर लाई गई नवविवाहिता को जल्द आने का आश्वासन देकर सूर्यबली सिंह ड्यूटी पर चले गए लेकिन लौटकर नहीं आए।

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शहीद की विधवा कुंती आज भी अपने मायके में रहती हैं। देश की आन-बान और शान की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सपूत की प्रतिमा आज तक ब्लॉक परिसर में नहीं लगाई जा सकी। इसके लिए पूर्व सैनिक संगठन के प्रयास से शहीद की प्रतिमा तो बनवा ली गई लेकिन प्रशासन की बेरुखी के चलते देश के लिए अपना बलिदान देने वाले की प्रतिमा लगवाई नहीं जा सकी है।

प्रशासन ने दिखाई बेरुखी
रतनपुरा ब्लॉक के नगवा गांव निवासी पूर्व सैनिक परमात्मा नंद सिंह भूतपूर्व सैनिक संगठन के तहत प्रथम बार 21 नवंबर 2016 को कुंती सिंह को रतनपुरा ब्लॉक मुख्यालय पर बुलाकर सम्मानित कराया था। फिर से 21 नवंबर 2017 को पूर्व सैनिक संगठन के नेतृत्व में शहीद सैनिक सूर्य बली सिंह की प्रतिमा लाकर शहीद स्थल के पास स्थापित की गई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद प्रतिमा वहां से उठाकर बगल के ही शिव मंदिर के पीछे फेंक दी गई।
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अत्यंत दुखी स्वर में परमात्मा नंद सिंह कहते हैं कि शहीद की प्रतिमा स्थापित कराने के लिए उन्होंने जिलाधिकारी से लेकर प्रदेश स्तर के अधिकारियों और नेताओं क के यहां चक्कर लगा चुका हूं, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
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