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गंगा पार जीवंत हुआ शांति का मार्ग

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वाराणसी। राम छाटपार शिल्प न्यास की ओर से गंगा पार शांति का मार्ग प्रशस्त हुआ, तो रेती पर सपनों का गंगा घाट नजर आया। वो गंगा घाट जो पूरी दुनिया में अपने तिलिस्म के लिए मशहूर है। बीएचयू के सुदीप्ता कर्माकर की करीब 50 फीट की लंबाई में मंदिरों, घाट की सीढ़ियां अपनी पूरी खूबसूरती के साथ गंगा रेती पर घाट की ये आकृति हर किसी को मोह रहे थे। रेती पर एक साथ राम मंदिर और बाबरी मस्जिद भी बिना किसी विवाद के साथ खड़े थे, एक ही प्रवेश द्वार के साथ। यही नहीं गंगा पार रेती पर टेंट सिटी भी उकेरी गई। दूर देश से आने वाले साइबेरियन के साथ ही प्रवासी भारतीय दिवस की शुरुआत करने वाले लक्ष्मी मल सिंघवी के पोट्रेट को चित्रकारों ने बड़ी खूबसूरती से उकेरा।
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शनिवार को सामने घाट के उस पार ‘रेत में आकृति की खोज’ में बीएचयू, काशी विद्यापीठ के साथ विभिन्न कालेज व स्कूलों के नन्हे चित्रकारों ने रेत पर आकृति बनाई। केंद्रीय विद्यालय की निधि, अरफा व प्रियंका ने सेव गर्ल पर आकृति बनाई तो चंदौली के विक्रम सिंह महाविद्यालय की छात्राओं ने शिक्षित बेरोजगारों का दर्द को रेत पर उकेरा। एबीआर कालेज की छात्राओं ने मीटू तो आईएफए के संजय व प्यारे लाल ने शांति का मार्ग थीम पर गौतम बुद्ध की आकृति बनाई। तिब्बती अध्ययन संस्थान की टीम ने लॉफिंग बुद्धा की आकृति उकेर कर गरीबी हटाने का संदेश दिया। काशी विद्यापीठ एनटीपीसी परिसर के छात्रों ने एक ओर टेंट सिटी उकेरी तो दूसरी टीम ने कुंभ चलो का संदेश दिया। नमामि गंगे, नारी शक्ति, दिव्य नगरी काशी, काशी दर्शन, नो स्मोकिंग, सेव बर्ड, सेव गर्ल थीम पर भी आकृतियां उकेरी गईं।
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