ज्ञानपुर। अन्नदान के महापर्व मकर संक्रांति (खिचड़ी) की तैयारियों को जिले में तेजी से अंतिम रूप दिया जा रहा है। घर-घर नए धान का चिवड़ा कुटवाने के साथ ही गुड़ और तिल को मिलाकर जायकेदार तिलकुट बनाने का सिलसिला तेज हो गया है। त्योहार के मद्देनजर दूकानदारों ने भी लोगों की मानसिकता को कैश कराने का पूरा इंतजाम कर लिया है। यही वजह है कि नगरों से लेकर गांव तक जगह-जगह तिलकुट, लाई, चिवड़ा और ढुंढा आदि की अस्थायी दूकानें सज गईं हैं।
मकर संक्रांति को लेकर कालीन नगरी की फिजा में उल्लास के रंग बिखरने लगे हैं। पतंगबाजी के शौकीन हुड़दंगबाजी की हद तक पहुंच गए हैं तो अन्नदान के त्योहार की तैयारियों के निमित्त घर-घर रौनक बढ़ चली है। सुबह से लेकर शाम तक छतों से लेकर मैदानों तक पतंगबाजी का शोर आम हो गया है। खिचड़ी पर तिल और गुड़ से बने तिलकुट और अन्नदान का खास महत्व होता है। इस दिन अन्न का स्पर्श कर मां अन्नपूर्णा का स्मरण करने के साथ ही अन्नदान कर पूरे जीवन धन-धान्य की कमी न होने की प्रार्थना की जाती है। त्योहार को लेकर जिले में तैयारियों को लेकर उत्साह का माहौल है। बाजार में भी रौनक बढ़ गई है। हालांकि इस बार तिल और गुड़ से बने सामान पर महंगाई का असर भी देखा जा रहा है। गुड़ और बेसन से बना लड्डू 60 से 70 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बाजार में बिक रहा है। जबकि पिछले साल यह 50 रुपये किलो था। इसी तरह तिलकुट 120 रुपये किलो के भाव से बाजार में उपलब्ध है। लाई अलग-अलग वैरायटी में 40 से 50, चिवड़ा 50 से 60 और चीनी-बेसन मिक्स लड्डू 70 से 80 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा है। जबकि गट्टा 60 रुपये किलो के भाव से जिले के बाजारों में मिल रहा है। हालांकि इसके बाद भी त्योहार के लिए खरीदारी कर रहे लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं है। दूकानदार कन्हैयालाल ने कहा कि इस बार दाम में मामूली बढ़ोतरी हुई है।