वाराणसी। जिले के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मतदाता फिर शहर के मतदाताओं पर भारी पड़े। इससे पहले 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में भी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं ने मतदान प्रतिशत के मामले में शहरी क्षेत्र में रहने वालों को मात दे दी थी। इस बार शहर के तीनों विधानसभा क्षेत्र में मतदान प्रतिशत बढ़ा नहीं, बल्कि पिछले दो चुनाव की तुलना में कम हो गया। जिले की आठ में से तीन विधानसभा शहर में और पांच विधानसभा ग्रामीण क्षेत्र में आती है।
गौर करने वाली बात है कि शहर क्षेत्र में मतदाताओं और मतदान केंद्रों के बीच की दूरी बहुत ज्यादा नहीं होती है। शहरी मतदाता ज्यादा पढ़े-लिखे होते हैं और शहर क्षेत्र में लगातार मतदाता जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। वहीं, ग्रामीण इलाकों में लंबी दूरी तय कर मतदाता मतदान केंद्रों तक पहुंचते हैं। इस बार के लोकसभा चुनाव में अजगरा, सेवापुरी और पिंडरा का मतदान प्रतिशत 2014 की तुलना में बढ़ा है।
चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सर्वाधिक जोर इस बात पर था कि वाराणसी जिले का मतदान प्रतिशत इस बार के लोकसभा चुनाव में बढ़े। मगर, लाख कवायदों के बावजूद जिले में मतदान प्रतिशत में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई। माना जा रहा है कि इसे लेकर आने वाले दिनों में जिले के भाजपा के छह विधायकों से पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जवाब तलब करेगा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की पहल के बावजूद वो मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने में अहम भूमिका का निर्वहन क्यों नहीं कर पाए। पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले राज्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी के शहर दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र में मतदान 2.03 प्रतिशत कम हुआ। वाराणसी संसदीय क्षेत्र में सबसे कम मतदान शहर उत्तरी विधानसभा में रहा, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले मतदान में 0.42 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी तरह पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में कैंट विधानसभा क्षेत्र में 1.31 प्रतिशत, शिवपुर में 1.76 प्रतिशत और रोहनिया में 0.26 प्रतिशत कम मतदान हुआ।