कौलापुर। करीब पांच साल बाद भी सांसद आदर्श गांव को विकास की दरकार है। तीन हजार से अधिक आबादी वाले सांसद आदर्श गांव कौलापुर में में समस्याएं खत्म नहीं हुई। सड़क, बिजली, पानी की बुनियादी समस्याओं को सुधारने का दावा जमीन पर नजर नहीं आ रहे हैं।
पानी की समस्या से निपटने के लिए सांसद ने प्रयास कर आरओ प्लांट तो लगवाया , लेकिन गांव की दलित बस्ती में सप्लाई का पानी अब तक नहीं पहुंच पाया। बस्ती के लोग पानी के लिए हैंडपंप और अन्य स्रोतों पर निर्भर हैं। पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से जगह-जगह पानी सड़कों पर बहता रहता है। इससे आवागमन भी प्रभावित होता है। 2014 में गोद लेने के बाद सांसद वीरेंद्र सिंह ने गांव में सामुदायिक भवन बनवाने के साथ ही एएनएम सेंटर, पोस्ट ऑफिस और पशु चिकित्सालय बनवाने का वादा किया। बाद में बताया गया कि इन विकास कार्यों को प्रस्तावित भी किया गया, लेकिन ग्रामीणों को मिला कुछ भी नहीं। गांव में सोलर लाइट, शौचायल की सुविधाएं कुछ ग्रामीणों को पहले ही मिलीं थीं। बाद में दो दर्जन के आसपास आवास भी बने। लेकिन, इन कार्यों में सांसद का प्रयास शामिल नहीं रहा। सांसद की ओर से गांव में आरओ प्लांट लगवाने के साथ ही 40 सोलर लाइटें, सात हैंडपंप लगवाए गए। साथ ही वाराणसी-प्रयागराज हाईवे से गांव में जाने वाले लगभग ढाई किमी लंबे संपर्क मार्ग की मरम्मत कराई गई। लाखों की लागत से पानी की टंकी तो बनाई गई, लेकिन उसका उपयोग ग्रामीणों को पानी आपूर्ति करने में अब तक नहीं हो पा रहा है।
सांसद आदर्श गांव कौलापुर में विकास के कई कार्य कराए गए हैं। पेयजल, बिजली और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम किए गए। टंकी का पानी कई घरों में नहीं पहुंच पा रहा है। उसके लिए भी काम चल रहा है। कई प्रस्ताव स्वीकृत हो चुके हैं, उन्हें भी पूरा किया जाएगा।
शैलेंद्र दुबे, सांसद प्रतिनिधि
इनसेट
आदर्श गांव में कुछ कार्य कराए गए हैं। हालांकि गति धीमी है। जो काम प्रस्तावित हैं, वे लंबे समय से लंबित पड़े हैं।
उषा देवी, ग्राम प्रधान
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बिजली कनेक्शन तो ज्यादातर स्थानों पर हो गया, लेकिन अब भी जरूरत है। पाइप लाइन से गांव में हर जगह पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
महेश यादव
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पानी की टोटियां शोपीस साबित हो रहीं हैं। लगने के बाद से अब तक पानी नहीं निकला। पाइप क्षतिग्रस्त होने से पानी नहीं मिल रहा है।
इंद्रेश मिश्रा
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सांसद आदर्श गांव घोषित कर विकास का जो सपना दिखाया गया था वह खोखला साबित हो रहा है। विकास के नाम पर जो कुछ कार्य हुए हैं, लेकिन आदर्श गांव के लिए पर्याप्त नहीं कहे जा सकते।
अजीत यादव