चौबेपुर। तोफापुर के लाल शहीद रमेश यादव का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े। थोड़ी ही देर बाद सीआरपीएफ के जवान पार्थिव शरीर लेकर बलुआ घाट जाने लगे तो पिता श्याम नारायण यादव नाराज हो गए। उन्होंने जिला प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जब बेटे को जी भर कर देखने भी नहीं देना है तो घर क्यों लाए। प्रशासन को जब सब कुछ अपने मन से ही करना है तो वह शवयात्रा में शामिल नहीं होंगे। यह सुनते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। ग्रामीण भी प्रशासन विरोधी नारेबाजी करने लगे तो सीआरपीएफ के जवान ताबूत वाहन लेकर रुक गए।
प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने श्याम नारायण को समझाना शुरू किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि सरकार शहीद के सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रतिनिधि के तौर पर आए केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने श्याम नारायण को हुई असुविधा के लिए माफी मांगी। इसके बाद प्रभारी डीएम गौरांग राठी और एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने उनकी मांगों को पूरा कराने का लिखित आश्वासन दिया। फिर लगभग एक घंटे बाद शवयात्रा घाट के लिए रवाना हुई।
यह हैं मांगे
श्याम नारायण की मांग है कि उनके बेटे के नाम पर गांव में प्रवेश द्वार और पक्की सड़क बनाई जाए। परिवार के लिए सरकार पेट्रोल पंप दे और बड़े बेटे के साथ ही बहू को नौकरी दी जाए। रमेश के बेटे की पढ़ाई का खर्च सरकार उठाए और मां-बाप को पेंशन मिले। मंत्री अनिल राजभर ने आश्वस्त किया कि सभी मांगे पूरी की जाएंगी। बाकी लोग नहीं भी आएंगे तो क्या हुआ, वह तो इलाके के ही हैं। आश्वस्त किया कि 15 दिन के भीतर प्रवेश द्वार का काम शुरू करा दिया जाएगा और जगह मिली तो शहीद के नाम पर गांव में मिनी स्टेडियम भी बनवाया जाएगा।
बड़ा भाई नहीं आ सका घर
शहीद रमेश का बड़ा भाई राजेश कर्नाटक में रह कर तबेले में काम करते हैं। राजेश अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके। इसे लेकर श्याम नारायण ने जिला प्रशासन को जमकर खरीखोटी सुनाई। कहा कि एसडीएम सदर ने राजेश के आने के लिए गोवा से टिकट की व्यवस्था कराने की बात कही थी, लेकिन कुछ नहीं किया। उसका मोबाइल भी बंद है, वह न जाने कहां और किस हाल में होगा। प्रशासन चाहता तो मेरा बड़ा बेटा अपने भाई को अंतिम बार देख लेता। इस पर मंत्री अनिल राजभर ने नाराजगी जताई और आश्वस्त किया कि एसडीएम सदर की इस गंभीर चूक को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाकर उनके खिलाफ कार्रवाई कराएंगे।