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लोक कला की बारीकियों से रूबरू होंगे कलाप्रेमी

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वाराणसी। हर प्रदेश, हर शहर और हर गांव की अपनी अलग संस्कृति है, अलग-अलग लोक कला है। सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान माने जाने वाली लोक कलाओं की अपनी अलग ही विशिष्टता है। इसी अनूठी विशिष्टता के चलते ही एक बार फिर से लोक कलाओं को सहेजा जा रहा है। फिर चाहे वो बिहार की मधुबनी लोक कला हो या फिर महाराष्ट्र की वर्ली, ओडिशाका पट्टचित्र और राजस्थान की लघु चित्रकारी। विलुप्त होती इन लोक कलाओं पर जमी धूल को हटाने का काम कुछ कलाकार कर रहे हैं तो कुछ कला प्रेमी। इन्हीं में एक अनूठी पहल की है स्टार्ट अप शुरूआर्ट ने।
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कला और कलाकारों को मंच देने का काम कर रहे शुरूआर्ट के युवाओं ने लोक कलाओं को समृद्ध करने की एक नई और अनूठी कोशिश शुरू की है। इन लोक कलाओं को सीखने और सिखाने के लिए कलाप्रेमियों को ऑनलाइन प्लेटफार्म दिया है। शुरुआत उन्होंने झारखंड की लोक कला सोहराई से की है। इसका पूरा एक घंटे का वीडियो लेक्चर तैयार किया गया है, जिसमें इस लोक कला के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। सोहराई का सांस्कृतिक महत्व क्या है, इसमें कौन से रंग इस्तेमाल होते हैं, रंग कैसे बनाए जाते हैं, इसमें ब्रश कौन से इस्तेमाल होते हैं, हर एक का बारीकी से वीडियो तैयार किया गया है। सीखने वाले को इस वीडियो को एक्सेस करने के लिए यूडेमी मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करना होगा। शुरूआर्ट की सीईओ सना सबा बताती हैं कि हमारी कोशिश यही है कि हम लोगों को लोक कला से जोड़ें। अब तक इस तरह का ऑनलाइन आर्ट कोर्स नहीं था। यू-ट्यूब पर वीडियो लेकिन वो सिर्फ डेमो के तौर पर। कोर्स को करने के बाद हम सर्टिफिकेट भी देंगे। हमारी ये भी कोशिश है कि इसमें स्टूडेंट्स को प्लेटफार्म मिले। जैसे सोहराई लोक कला के बारे में झारखंड के युवा कलाकार हितेश चौधरी का लेक्चर है। हितेश अभी बीएचयू से एमएफए कर रहे हैं। आगे अब दूसरी लोक कलाओं के भी कोर्स मैटेरियल तैयार करेंगे।
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