वाराणसी। विश्व धरोहर दिवस पर गुरुवार को गुरुधाम मंदिर परिसर और सारनाथ में आयोजित छायाचित्र प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं ने अलग-अलग चित्रों के माध्यम से धरोहरों को संरक्षित करने का संदेश दिया। वक्ताओं ने विभिन्न विद्यालयों से आए छात्रों से धरोहरों के महत्व के बारे में बातचीत की और अपने अनुभवों को साझा करते हुए धरोहरों के संरक्षण का आह्वान किया।
क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई, इंटैक वाराणसी चैप्टर के तत्वावधान में गुरूधाम में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों ने सारनाथ, रामनगर, गंगा के घाट, पुरावशेषों, उत्खनित पुरास्थलों, संरक्षित स्मारकों और प्राचीन अभिलेखों पर आधारित चित्र प्रदर्शित किए। कार्यक्रम का उद्घाटन पद्मश्री संतोष यादव ने किया और कहा कि धरोहरों के बारे में सभी को जागरूक करने की जरूरत है। इसमें छात्रों की भूमिका अहम है। कार्यक्रम में नलिन गुलाटी, प्रो. राणा पीबी सिंह, डॉ. निर्मल जोशी, डॉ. सुजीत चौबे, प्रशांत राय, शैज खान, बलराम यादव, पंचबहादुर, कृष्णा, प्रदीप कुमार, अशोक कपूर, डॉ. सुभाष चंद्र यादव, डॉ. निर्मल जोशी और डॉ. सुजीत कुमार मौजूद रहे। उधर सारनाथ में पुरातात्विक उत्खनित परिसर में छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई। इस दौरान आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में छात्रों ने चित्रों में धरोहरों को दर्शाया। महाबोधि इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. बेनी माधव ने उद्घाटन के बाद प्रदर्शनी का अवलोकन कर विजेताओं को पुरस्कृत किया। धरोहर दिवस पर प्राचीन स्मारकों को देखने के लिए प्रवेश शुल्क नहीं लिया गया। अधीक्षण पुरातत्वविद नीरज सिन्हा ने बताया कि छात्रों को प्राचीन स्मारकों की ऐतिहासिकता के बारे में जागरूक करना ही उद्देश्य है।
सुरक्षा कारणों के मद्देनजर पुरातात्विक संग्रहालय में दक्षिण-पश्चिम दिशा के कोने पर एक नया गेट बनाया जा रहा है। लगभग एक माह में गेट बनकर तैयार हो जायेगा। इसके बाद इसे आम लोगों के लिए खोल दिया जायेगा। इस संबंध में अधीक्षण पुरातत्वविद नीरज सिन्हा ने बताया कि किसी भी म्यूजियम में मेन गेट प्रवेश गेट के सामने नहीं होता है। संग्रहालय का मेन गेट व प्रवेश गेट एक सीध में न होने पर अप्रत्याशित घटनाओं को रोका जा सकता है। बताया कि नया मेन गेट बनने के बाद एक पाथ वे भी बनाया जायेगा। पुराने गेट को वी आई पी प्रवेश द्वार बना दिया जायेगा।