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बौद्धों की नीति को सनातन धर्म ने भी अंगीकार किया: कुलपति

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वाराणसी। बौद्धों की नीतिशास्त्र को सनातन धर्म ने भी अंगीकार किया है। प्राणियों के प्रति दया भाव, मैत्री भाव सह अस्तित्व का भाव और मानवता का संदेश आज दुनिया के निए प्रासंगिक हुआ है। यह बातें बुधवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्व विद्यालय के योग साधना केन्द्र में आयोजित बौद्ध धर्म का ईसाई धर्म का अभ्युदय में प्रभाव विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला के दौरान कुलपति प्रो राजाराम शुक्ल ने कही।
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श्रमण विद्या संकाय की ओर से आचार्य जगन्नाथ उपाध्याय स्मृति व्याख्यानमाला के मुख्य वक्ता मोती लाल लेहरचन्द्र संस्थान दिल्ली के निदेशक प्रो. गया चरण त्रिपाठी ने कहा कि अध्यात्मिक चेतना ने तप तथा भ्रम को विकसित किया है, तपस्वी तथा श्रमण का उद्देश्य आध्यात्मिक मुक्ति रहा है। प्रति कुलपित प्रो. हेतराम कछवाह ने कहा कि प्रारंभिक समय में न कोई राजा की मान्यता थी और न कोई प्रजा और राज्य का धर्म ही प्रमुख था, धर्म ही सभी का शासक था। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण और मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। संचालन प्रो. हर प्रसाद दीक्षित ने और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. रमेश प्रसाद ने किया।
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