वाराणसी। बीएचयू आईएमएस में एम्स जैसी सुविधाएं देने मात्र से मरीजों को राहत नहीं मिलने वाली है। जिस तरह से यहां मरीजों का दबाव बढ़ता जा रहा है, उसके हिसाब से मरीजों के लिए तत्काल बेड बढ़ाए जाने के साथ ही डॉक्टरों की कमी को पूरा करना जरूरी है। एम्स जैसी सुविधाएं मिलने से कुछ अत्याधुनिक मशीनें और उपकरण आ जाएंगे, ग्रांट बढ़ जाएगी लेकिन आईसीयू समेत अन्य जगहों पर बेड की कमी जस की तस रहेगी। नतीजतन, मरीजों को मजबूरी में दूसरी जगह जाना ही पड़ेगा
आईएमएस में एम्स जैसी सुविधाओं पर डॉक्टरों के साथ संवाद कर केंद्र की योजना की जानकारी देने के लिए शनिवार को पांच केंद्रीय मंत्री और प्रदेश के एक मंत्री वाराणसी आएंगे। इनकी मौजूदगी में इसके लिए अनुबंध भी किया जाएगा। फिलहाल, 1660 बेड वाले सर सुंदरलाल अस्पताल और 330 बेड के ट्रॉमा सेंटर के बाद भी हर दिन सैकड़ों मरीजों को बेड के लिए जूझना पड़ता है। इसका अंदाजा ट्रॉमा सेंटर के गलियारे में हर दिन स्ट्रेचर पर पड़े मरीजों के साथ ही सर सुंदरलाल अस्पताल की इमरजेंसी के सामने बेड खाली होने का इंतजार करने वाले मरीजों और परिजनों को देखकर लगाया जा सकता है।