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कक्षा एक से तीन तक की आईं किताबें, वितरण जल्द

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वाराणसी। प्राइमरी स्कूल में पढ़ रहे कक्षा एक, दो और तीन के विद्यार्थियों को भी जल्द नई किताबें मिलेंगी। इन तीन कक्षाओं की किताबों की भी खेप आ गई है, हालांकि इन कक्षाओं की किताबें भी अभी आधी अधूरी ही हैं। फिलहाल जितनी किताबें आईं है, इनका वितरण जल्द ही विद्यालयों में शुरू करा दिया जाएगा। उधर अब भी कक्षा चार, पांच, सात और कक्षा आठ की एक भी किताबें नहीं आईं हैं। बच्चे पुरानी किताबों से भी पढ़ाई करने को मजबूर हैं। उधर 15 जुलाई तक कि ताबों के वितरण का समय भी पूरा होने जा रहा है। अब जाहिर है कि निर्धारित तिथि तक बच्चों को पाठ्य पुस्तकें मिलने से रहीं। बीएसए कार्यालय को प्राप्त किताबों की नई खेप में कक्षा एक की सिर्फ एक ही किताब कलरव आई है। वहीं कक्षा दो की दो किताबें कलरव व गिनतारा और कक्षा तीन की तीन किताबें कलरव, गिनतारा व हमारा परिवेश इस नई खेप में शामिल है। बीएसए जयकरन यादव का कहना है कि जितनी किताबें मिली हैं, फिलहाल इसका वितरण जल्द से जल्द कराना सुनिश्चित किया जा रहा है। अन्य कक्षाओं की किताबें भी जल्द ही हमें मिल जाएंगी। कक्षा छह की जितनी किताबें आईं थीं, उनका वितरण किया जा चुका है।
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आरटीई के तहत दाखिले में हो रही हीलाहवाली
वाराणसी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत दाखिले में कान्वेंट स्कूलों की हीलाहवाली की शिकायत सामने आ रही है। कई अभिभावक अपनी शिकायत लेकर बीएसए कार्यालय पर पहुंच रहे हैं। अभिभावकों की शिकायत ये है कि कई स्कूल उन्हें ये कहकर मना कर दे रहे हैं कि उनका स्कूल अल्पसंख्यक स्कूल के दायरे में आता है। बीते दिनों राइफल क्लब में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई प्राइवेट स्कूल के प्रिंसिपल और प्रबंधकों ने खुद को अल्पसंख्यक श्रेणी का स्कूल बताया था। इस शिकायत पर बीएसए जयकरन यादव ने सभी स्कूलों को पत्र जारी कर उनके अल्पसंख्यक स्कूल होने का प्रमाण मांगा है। किस आधार पर वो खुद को अल्पसंख्यक स्कूल के दायरे में ला रहे हैं, इसका प्रमाण मांगा है। बीएसए का कहना है कि अल्पसंख्यक स्कूल वही होंगे जहां अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की संख्या पचास फीसदी से अधिक हो।
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