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मोहे मारे नजरिया संवरिया रे...

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वाराणसी। बीएचयू कला संकाय में चल रहे चार दिवसीय युवा महोत्सव संस्कृति के दूसरे दिन मंगलवार को प्रतिभागियों ने अपनी कला से लोगों का दिल जीत लिया। गायकी में जहां एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति की, वहीं वादन प्रतियोगिता में तबला, हारमोनियम पर सुमधुर धुन बजाकर स्पंदन में जगह बनाने की दावेदारी रखी। इसके साथ ही कार्टूनिंग, ऑन-द-स्पाट पेंटिंग, पोस्टर मेकिंग, स्केचिंग की प्रतियोगिता में भी प्रतिभागियों ने प्रतिभा का लोहा मनवाया।
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कला संकाय सभागार में चली गायन प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने होली, कजरी, दादरा आदि में गीतों की प्रस्तुति की। इसमें राममोहन ने रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे, मोहे मारे नजरिया संवरिया रे...। गीत के माध्यम से कृष्ण और गोपियों के बीच ठिठोली का वर्णन किया। इसके बाद अंकित कुमार ने ऐ री सखी मोरा पिया घर आयो... और फिर कालू तमांग ने मोहे लागी लगन गुरु चरणन... गीत से प्रभु का गुणगान किया। छात्र सलाहकार डॉ. रंजीत प्रताप सिंह और छात्र समन्वयक अभिषेक मिश्र की देखरेख में चल रहे महोत्सव में कार्टूनिंग में प्रतिभागियों ने अलग-अलग कार्टून बनाकर समाज में फैले भ्रष्टाचार का दृश्य अंकित किया। स्केचिंग में किसी ने बीएचयू का सिंह द्वार तो किसी ने काशी के घाटों को पोस्टर पर उकेरा। अभिषेक मिश्र ने बताया कि तीसरे दिन बुधवार को लघु नाटक, एकल, समूह गान की प्र्रतियोगिताएं होंगी। इस दौरान कुलदीप, चंद्रहास, दिपेश, प्रियांशु, चंद्राली, दीपशिखा आदि मौजूद रहे।
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