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विकास को राम से जोड़ें, सच होगी रामराज्य की परिकल्पना

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गुंजन श्रीवास्तव
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वाराणसी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के छह दिवसीय प्रचारक वर्ग शिविर में कार्ययोजना 2019 के तहत वृहद चर्चा में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए माहौल बनाने और विकास कार्यों को श्रीराम से जोड़ कर रामराज्य की परिकल्पना साकार करने पर मंथन किया गया। इसके लिए धर्मनिष्ठ और राष्ट्रवादी सरकार जरूरी बताते हुए कहा गया कि राम भारत के प्रत्येक नागरिक की आस्था में हैं। राम का मंदिर ही रामराज्य की स्थापना में सहायक होगा। राम मंदिर के लिए 25 नवंबर को अयोध्या में हिंदू संगठनों के एकजुट होने की योजना भी शिविर का मुख्य मुद्दा रहा।
सर संघ चालक मोहन भागवत की मौजूदगी में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा के सत्र मंदिर, श्रीराम, अयोध्या केंद्रित रहे। कहा गया कि अतर्क्य आस्था का प्रतीक मर्यादा पुरुषोत्तम राम राष्ट्र् का विषय हैं, जिनके मंदिर के निर्माण के लिए रणनीति-राजनीति की आवश्यकता नहीं है। वैचारिक दृष्टि से विकास की धुरी श्रीराम हैं और श्रीराम ही संपन्नता है। संपूर्ण वैश्विक जगत के विकास में राम की संस्कृति, व्यवहार और आदर्श जब मूल में रहता है, तब उस राष्ट्र की व्यवस्था सटीक होती है।
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प्रचारकों को फिर बताया गया कि रामचरित मानस के उत्तर कांड में उल्लेख है कि जन्मभूमि मम पुरी सुहावनि। उत्तर दिसि बह सरजू पावनि।। जा मज्जन ते बिनहिं प्रयासा। मम समीप नर पावहिं बासा।। अर्थात यह सुहावनी पुरी मेरी जन्मभूमि है। उसके उत्तर दिशा में जीवों को पवित्र करने वाली सरयू नदी बहती है, जिसमें स्नान करने से मनुष्य बिना ही परिश्रम मेरे समीप निवास पा जाते हैं। उत्तर कांड में यह भी उल्लेख हैं- अति प्रिय मोहि इहां के बासी। मस धामदा पुरी सुख रासी।। अर्थात यहां के निवासी मुझे बहुत ही प्रिय हैं। यह पुरी सुख की राशि और मेरे परमधाम को देने वाली है।
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