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काशी में फिर होगा असि-गंगा का संगम

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वाराणसी। असि नदी के पुनरोद्धार की दिशा में गुरुवार को बड़ी पहल हुई। सूबे के होमगार्ड, सैनिक कल्याण, नागरिक सुरक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनिल राजभर ने असि-गंगा संगम की वापसी के लिए अभियान चलाने का भरोसा दिलाया। असि-गंगा संगम को पाट कर नदी की धारा परिवर्तित कर नगवा में मिला दी गई है। इससे असि -गंग के तीर के मायने अब काशी में खत्म हो चुके हैं। मंत्री ने नदी को पुनर्जीवन के लिए काम करने वाले जन संगठनों को भरोसा दिलाया कि वह हर महीने तीसरे रविवार को खुद असि नदी के तट पर श्रमदान में हिस्सा लेंगे।
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मंत्री अनिल राजभर दिन के करीब 10 बजे पट चुके असि-गंगा संगम स्थल के पास चल रहे श्रमदान स्थल पर पहुंचे। वहां होमगार्ड्स ने बैंडबाजे की धुन पर उनका स्वागत किया। मंत्री ने कहा कि असि नदी को मूल रूप में वापस लाने के लिए जो भी जरूरी होगा, प्रयास किया जाएगा। असि काशी की पहचान है। मंत्री ने कहा कि वह हर महीने के तीसरे रविवार को खुद श्रमदान करेंगे। उन्होंने अपने विभाग के अफसरों को निर्देशित किया कि वह रोजाना असि नदी के श्रमदान में भागीदारी तय करें।
नाले में तब्दील हो चुकी असि नदी को बचाने के लिए नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के सलाहकार और पूर्व डीजी(नागरिक सुरक्षा) आरएन सिंह के नेतृत्व में अभियान चल रहा है। इस मुहिम से असि नदी मुक्ति अभियान और यमुना मिशन समेत कई जन संगठन जुड़ गए हैं। सहोदरबीर पुलिया -रवींद्रपुरी के बीच जेसीबी से अभियान चलाकर महीने भर के दौरान असि के तट पर किए गए दर्जन भर से अधिक कब्जे ढहाए जा चुके हैं। नदी की सिल्ट हटाने के साथ ही पाटों को भी चौड़ा किया जा रहा है। पखवारे भर पहले सूबे के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने असि के तट पर फावड़ा चलाया था। इस मौके पर कपींद्र तिवारी, चंद्रशेखर सेठ, अक्षयबर सिंह, आनंद प्रकाश तिवारी समेत तमाम लोग उपस्थित थे।
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