वाराणसी। बीएचयू के भारत अध्ययन केंद्र में चल रही 15 दिवसीय कार्यशाला के समापन समारोह में वक्ताओं ने स्मृति तत्व पर चर्चा की। मुख्य अतिथि बीएचयू संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. जयशंकर लाल त्रिपाठी ने कहा कि पहले धर्मसूत्रों की रचना हुई, जिनसे स्मृतियों को श्लोकों में रचा गया है। ऐसे में रागद्वेष से रहित नई स्मृति की रचनाओं की जरूरत है।
‘स्मृतितत्वविमर्श’ विषयक कार्यशाला में जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय पुरी में धर्मशास्त्र विभाग के पूर्व आचार्य प्रो. ब्रजकिशोर स्वाई ने कहा कि प्राचीन धर्मशास्त्र के ग्रंथों की वर्तमान समय में समाज से संबद्धता पर विचार करने की जरूरत है। प्रो. युगल किशोर मिश्र ने कहा कि शरीर में मन, बुद्धि और आत्मा रहती हैं। शरीर दिखाई देता पर ये तीनों दिखाई नहीं देते। अध्यक्षता प्रो. रेवा प्रसाद द्विवेदी ने की। इस दौरान प्रो. सदाशिव द्विवेदी, डॉ. स्मृति सरकार, डॉ. पंचानन दलाई, प्रो. शशि श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।