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147 साल पुरानी करमाइकल लाइब्रेरी होगी ध्वस्त

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वाराणसी। बनारस में 147 साल पुरानी करमाइकल लाइब्रेरी आखिर ध्वस्त की जाएगी। इसके बाद न केवल काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में आ रही रूकावट दूर हो गई है बल्कि ध्वस्तीकरण से मुआवजे की मांग कर रहे दुकानदारों को मुआवजा भी मिलेगा। लाइब्रेरी की अगर बात करें तो यहां करीब एक लाख से अधिक दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह हैं।
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बांसफाटक स्थित करमाइकल लाइब्रेरी को बनारस की पहली सार्वजनिक लाइब्रेरी मानी जाती है। इसमें दुर्लभ पुस्तकों और ग्रंथों का संग्रह है। 1872 में संकठा प्रसाद खत्री ने बनारस के तत्कालीन कमिश्नर सीपी कारमाइकल के नाम पर की थी। यह भी कहा जाता है कि इसी लाइब्रेरी में मुंशी प्रेमचंद, भारतेंदु हरिश्चंद्र, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी जैसे विद्वान आते थे। इसके निर्माण के लिए महाराजा विजय नगर और काशी के अन्य साहित्यप्रेमियों ने जमीन खरीदी थी। लाइब्रेरी के भवन को 15 फरवरी को खरीदे जाने के 2 दिन बाद 17 फरवरी को ही श्रीकाशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद ने इसे खाली करने के लिए नोटिस भेजा था। इसके बाद से ही इसे ध्वस्त करने का विरोध चल रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि ध्वस्त करने का फैसला सुनाया है। साथ ही विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को यह आदेश दिया है कि भवन की दुकानों के लिए 16 लाख रुपये मुआवजे का भुगतान करे। माना जा रहा है कि इसके बाद पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का रास्ता भी साफ हो गया है।
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