वाराणसी। भगवान भाष्कर का ताप बढ़ने के साथ नगर में भूजल ने पाताल की राह पकड़ ली है। सदानीरा के किनारे बसी काशी के लोग अब पानी के लिए तरसने लगे हैं। शहर के ऊंचाई वाले स्थानों पर पाइप लाइन के सहारे पानी नहीं पहुंच रहा है तो कई मोहल्लों के हैंडपंप भी धोखा दे चुके हैं। ज्ञापन और शिकायत के बाद भी जलसंकट की समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकल रहा है। हालत यह है कि रोजाना हजारों लीटर पानी पाइप टेस्टिंग में ही बर्बाद हो जा रहा है और कई इलाकों में लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है।
शहर के वीआइपी मोहल्ले हों या कोई सामान्य हर जगह पानी के लिए लोग परेशान हैं। सुबह से देर रात तक पानी के लिए लोग मशक्कत कर रहे हैं। नरिया, लंका, तेलियाबाग समेत कई क्षेत्रों में लोग टैंकर से पानी लेने के लिए विवश हैं। शिवाला क्षेत्र में हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। वहीं गंगा के घटते जलस्तर ने शहर की पानी सप्लाई को भी प्रभावित किया है। इसको देखते हुए जलसंस्थान ने अलर्ट भी जारी किया है। शहर के ट्यूबवेल भी अब पानी छोड़ने की कगार पर पहुंच चुके हैं।
जिन मोहल्लों में हैंडपंप चल रहे हैं, वहां भी पानी के लिए मारामारी हो रही है। जल संकट से जूझ रहे लोगों की गुहार को जलकल व जल निगम अनसुनी कर कर दे रहें हैं। विभागों में शिकायत करते लोग थक गए हैं लेकिन समस्या का निदान नहीं हो रहा। ऐसे में लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है और वे प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतर रहे हैं। यही हाल शहर के अन्य मोहल्लों का भी है। पानी के लिए जलकल की तरफ से मोहल्ले में एक टैंकर खड़ा कर दिया जा रहा है जो नाकाफ ी है। हैंडपंप और टैंकर के पास दिनभर लोग पानी के लिए जद्दोजहद करते नजर आ रहे हैं।
जलकल संस्थान के महाप्रबंधक नीरज गौंड का कहना है कि जहां पानी नहीं मिलने की शिकायत हैं, वहां पर टैंकर से व्यवस्था कराई जा रही है। गंगा के घटते जलस्तर को देखते हुए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।