वाराणसी। मुकद्दस रमजान के जाने का गम और ईद के आने की खुशी रोजेदारों के चेहरे पर साफ नुमाया हो रही है। अब रमजान चंद दिन का मेहमान है, इसका गम है, तो वहीं दूसरी ओर इस बात की खुशी भी है कि एक महीने कामयाबी से रोजा रखने के बाद ईद आएगी। अल्लाह रमजान के एवज में जो तोहफा देते हैं उसे ईद के नाम से जाना जाता है। ईद का यह भी एक पैगाम है कि नमाज से पहले सदका ए फितर दे दिया जाए। फितरा देने की वजह से इसे ईद उल फितर भी कहते हैं। अल्लाह फरमाता है ईद तोहफ ा है रोजेदारों के लिए।
शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि ईद की खुशियां चांद देखकर मनाई जाती हैं। जैसे ही चांद का दीदार होता है एतेकाफ पर बैठे लोग अपनी इबादत की कामयाबी पर खुशी-खुशी वापस अपने घरों को लौटते हैं। जहां घर और मोहल्ले के लोग एतेकाफ की कामयाबी से लौटने पर उनका खैरमकदम करते हैं। ईद की नमाज हर मुसलमान पर वाजिब होने की वजह से ही ईद के दिन हर मुसलमान नमाज अदा करता दिखाई देता है।
ईद की नमाज से पहले मोमिनीन को चाहिए कि वो गरीबों, मिसकीनों को जकात, फि तरा व खैरात जरूर दें, ताकि ईद के दिन किसी के तन पर मैला कपड़ा नजर न आए। कोई कहीं अपने आपको मायूस व बेचारा न समझे, क्योंकि ईद का मतलब ही खुशी होती है इसलिए जब हम खुशी मनाए तो हमारे इर्द-गिर्द, आसपास व पड़ोस में जो भी है वो सभी खुश हों, तभी सही मायने में हमारी खुशी या हमारी ईद होगी।
साप्ताहिक बंदी में खुलेंगे बाजार
ईद के मद्देनजर जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बाजारों की साप्ताहिक बंदी को समाप्त कर दिया है। उसकी एवज में अगले सप्ताह में 13 जून को दुकान और प्रतिष्ठान बंद रहेंगे। सुबह आठ से रात 11 बजे तक वाणिज्य अधिष्ठान खुलेंगे और निर्धारित अवधि से ज्यादा काम करने पर कर्मचारियों को अधिक घंटे के लिए दोगुने वेतन का निर्देश दिया है।