सारनाथ। आजाद: आशा की किरण और काशी मेडिकेयर के तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने धर्म और संस्कृति पर अपनी बात रखी। बतौर मुख्य अतिथि कनाडा से आए वैज्ञानिक डॉ. आजाद कौशिक ने कहा कि जिस समय जापान द्वितीय विश्व युद्ध में पूरी तरह से तबाह हो गया था, तब एक आशा बची हुई थी। किसी भी देश का आधार वहां का धर्म और संस्कृति होती है।
सारंग चौराहा स्थित एक उपवन में एडवांसिंग इंडियन घाट, कल्चरल एंड इकोनामी इन ग्लोबलाइजेशन वर्ल्ड विषयक संगोष्ठी में डॉ. कौशिक ने कहा कि किसी भी देश को बनने में 100 साल का वक्त लगता है। धर्म ही हमें जीवित रख सकता है। इसलिए हमें अपनी संस्कृति अपने धर्म को नहीं छोड़ना चाहिये। लेकिन वर्तमान समय में भारत अपनी संस्कृति को छोड़ते हुए पाश्चात्य संस्कृति को अपना रहा है। बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने भी धर्म और संस्कृति को अपनाने की बात कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर श्रद्धानंद और विषय स्थापना अखिलानंद ने किया। इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को काशी के कर्मवीर अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस दौरान संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल वीके शर्मा, डॉ. हेमंत गुप्ता, डॉ. राम सुधार सिंह, डॉ. बैजनाथ, डॉ. प्रकाश श्रीवास्तव, डॉ. मनोज श्रीवास्तव, डॉ. शिप्रा धर, मनोज कुमार, प्रवीण शर्मा आदि मौजूद रहे।