वाराणसी। नागरी नाटक मंडली सभागार में शनिवार को नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के कलाकारों ने स्वप्नवासवदत्तम की प्रस्तुति दी। स्वप्नवासवदत्तम नाटक अवंतीराज पुत्री वासवदत्ता और मगधराज पुत्री पद्मावती के आपसी प्रेम और समर्पण को चित्रित करता है। कई सारे रोचक घटनाक्रमों के साथ नाटक अपने उत्कर्ष पर पहुंचता है। हालांकि समीक्षकों ने ज्ञानप्रवाह के संस्कृत संस्करण के मुकाबले एनएसडी की प्रस्तुति को प्रभावहीन बताया।
समीक्षकों का कहना है कि संगीत परिकल्पना, प्रकाश परिकल्पना प्रशंसनीय रही, लेकिन नृत्य संरचना में कृति वाघमारे के प्रयासों को आत्मसात करने में कलाकार असफल रहे। संगीत पक्ष एवं प्रकाश परिकल्पना को अलग कर दिया जाए तो यह नाट्य प्रस्तुति राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के स्तर से प्रतिकूल थी। पुरुष पात्रों में विदूषक के रूप में प्रवीण मड़के और स्त्री पात्रों में वासवदत्ता की भूमिका में करिश्मा देसले तथा तापसी की भूमिका में नैंसी सेठ ने दर्शकों को प्रभावित किया। अन्य कलाकार अपने पात्र से न्याय नहीं कर सके। संगीत परिकल्पना आमोद भट्ट, प्रकाश परिकल्पना नारायण चौहान और नृत्य संरचना कृति वाघमारे की रही। निर्देशक के एस राजेंद्रन रहे। उदयन की भूमिका में निखिल ठाकुर, वासवदत्ता की भूमिका में करिश्मा देसले, पद्मावती पूजा सेन, यौगंधरायण की भूमिका में अंकुर सिंह ने शानदार अभिनय किया।