वाराणसी। रेलवे के जरिए जम्मू से काशी पार्सल की गई स्कूटी सोलह दिन बाद भी कैंट रेलवे स्टेशन पर नहीं उतारी गई। यह बात अलग है कि सेना के सूबेदार की यह स्कूटी अलग-अलग ट्रेनों से छह बार यहां से गुजर चुकी है। घर आए इस जवान की सात दिन की छुट्यिां भी स्कूटी की तलाश में कैंट स्टेशन के चक्कर काटने में गुजर गईं। अब परिवार वाले रसीद लेकर चक्कर काट रहे हैं। लेकिन पार्सल विभाग की मनमानी का आलम यह है कि वह स्कूटी उतारने के लिए तैयार ही नहीं हैं। फिलहाल स्कूटी ट्रेन में ही सवार है।
जम्मू-कश्मीर में तैनात सूबेदार नित्यानंद सिंह 13 मई को एक सप्ताह की छुट्टी पर वाराणसी अपने घर आ रहे थे। कोटा-पटना एक्सप्रेस में सवार नित्यानंद ने इसी ट्रेन में स्कूटी पार्सल विभाग के जरिए बुक कराई थी। 14 मई को रात 1:30 बजे ट्रेन वाराणसी पहुंची। उन्होंने ट्रेन गार्ड और पार्सल विभाग के लोगों से पार्सल उतरवाने के लिए कहा, लेकिन अनुनय, विनय के बाद भी पार्सल नहीं उतारा गया। उनसे कहा गया कि गाड़ी जब पटना से वापस आएगी तो स्कूटी उतर जाएगी। ट्रेन जब पटना पहुंची तो कोटा-पटना एक्सप्रेस से उतार कर स्कूटी एर्नाकुलम एक्सप्रेस में लोड कर दी गई। यह ट्रेन भी कैंट रेलवे स्टेशन से गुजरी, लेकिन स्कूटी फिर नहीं उतारी गई।
एक बार फिर पार्सल वालों ने स्कूटी को एर्नाकुलम से उतारा और वापस कोटा-पटना एक्सप्रेस में लोड कर दी। इस बार भी ट्रेन कैंट रेलवे स्टेशन होते हुए पटना चली गई और स्कूटी उसी में सवार रही। 13 मई से लेकर अब तक ट्रेन में लोड स्कूटी छह बार कैंट रेलवे स्टेशन से गुजर चुकी है, लेकिन इसे नहीं उतारा गया। सूबेदार नित्यानंद की छुट्टियां भी स्कूटी की लोकेशन तलाशने और वाराणसी में उतारने के प्रयास में बीत गईं। उनका आरोप है कि इस दौरान पार्सल सुपरवाइजर कई बार मिला, लेकिन सहयोग के बजाय उसने दुर्व्यवहार किया। अब परिवार वाले हर दिन चक्कर काट रहे हैं।