वाराणसी। बीएचयू गीता समिति द्वारा आयोजित रविवासरीय गीता प्रवचन के समापन समारोह में वक्ताओं ने गीता के उपदेशों से जीवन को सफल बनाने की बात कही। बतौर मुख्य अतिथि गोरखपुर विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. बनारसी त्रिपाठी ने कहा कि गीता में हमें समान भाव रखने की सीख मिलती है। यह हमें समत्व की शिक्षा देती है। चाहे सुख हो या दु:ख हो, सभी समय मेें समत्व भाव रखना चाहिए।
मालवीय भवन में आयोजित समारोह में प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि जीवन में दो मार्ग बताए गए हैं। प्रवृृत्ति मार्ग तथा निवृृत्ति मार्ग। गीता हमें प्रवृृत्ति मार्ग के साथ निवृृत्ति मार्ग की ओर ले जाने वाला शास्त्र है। महामना मालवीय मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनारायण श्रीवास्तव ने कहा कि विश्व के समक्ष आतंकवाद और पर्यावरण असंतुलन प्रमुख समस्या है। गीता के उपदेशों से हम दानों समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार शुक्ल ने तनाव प्रबंधन के लिए गीता को सबसे सुंदर ग्रंथ बताया। अतिथियों का स्वागत गीता समिति के सचिव डॉ. उपेंद्र त्रिपाठी, संचालन प्रो. सुमन जैन और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. रुद्र प्रकाश मलिक ने किया। इस दौरान प्रो. जयप्रकाश लाल, प्रो. सदाशिव द्विवेदी, प्रो. रविंद्रनाथ मिश्र, प्रो. उपेंद्र पांडेय आदि मौजूद रहे।