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इमाम अली की शहादत पर उठा तुरबत का जुलूस

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वाराणसी। शिया मुसलमानों के पहले इमाम और पैगंबर साहब के चचेरे भाई इमाम अली की शहादत को इस वर्ष 1400 साल पूरे हो गए। इमाम अली की शहादत की याद में शहर के दालमंडी इलाके से अलम व तुरबत का जुलूस निकाला गया जो लल्लापुरा स्थित दारगाह ए फ ातमान में खत्म हुआ। इस दौरान भारी संख्या में शिया संप्रदाय के लोग हाय अली की सदा लगाते और मातम करते चल रहे थे। जुलूस अपने कदीमी रास्तों दालमंडी, नई सड़क, शेख सलीम फ ाटक, कालीमहल, पितरकुंडा, लल्लापुरा होते हुए दरगाह ए फ ातमान में समाप्त हुआ।
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जुलूस उठने से पूर्व दालमंडी के चाहमामा इलाके में मीर नादे अली की मस्जिद में मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि इमाम अली जब 19 रमजान सन 40 हिजरी को मस्जिदे कूफ ा में दाखिल हुए थे उनका कातिल अब्दुर्रहमान इब्ने मुलजिम मस्जिद में सोया हुआ था। आप ने उसे बेदार किया और नमाज की तरफ आमादा होने को कहा। कुछ ही देर बाद जब इमाम नमाजे फ ज्र के पहले सजदे में गए तो अब्दुर्रहमान ने इमाम अली के सर पर जहर बुझी तलवार से वार कर दिया। मौलाना ने बताया कि इमाम अली का किरदार ऐसा था कि जब उनके बेटे इमाम हसन अब्दुर्रहमान को रस्सियों से बांधकर उनके सामने लाए तो उन्होंने उसके हाथ खोलने को कहा। इमाम अली तीन दिनों तक तड़पते रहे। उनकी शहादत 21 रमजान को हुई। बाद मजलिस शबीहे ताबूत और अलम बरामद हुआ। इसमें अंजुमन हैदरी चौक बनारस ने नौहाख्वानी व मातम किया।
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