वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहले से बड़ी जीत देकर काशी ने देश को विकास का संदेश दिया है। पांच साल में काशी सहित पूर्वांचल में पीएम मोदी के काम और जुड़ाव के चलते जनता ने उन पर फिर भरोसा जताया है। उधर, पीएम भी काशी की जनता से बने रिश्ते से आश्वस्त रहे और नामांकन के बाद प्रचार के लिए नहीं आए। वीडियो जारी कर काशीवासियों से लोकतंत्र के महापर्व में भागीदारी की अपील की, लेकिन खुद के लिए वोट नहीं मांगे। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने प्रचार की कमान थामे रखी।
2014 में सांसद बनने के बाद प्रधानमंत्री ने काशी के कायाकल्प के लिए 42 हजार करोड़ की करीब 500 परियोजनाओं को धरातल पर उतारा और बदलते बनारस का स्वरूप सबके सामने रखा। काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास क्षेत्र खाली कराकर काशी विश्वनाथ धाम की नींव रखी। आध्यात्मिक काशी को संवारते हुए आधुनिक काशी के रूप में सजाया। पांच साल में उन्होंने 20 बार यहां का दौरा किया और हर बार करोड़ों रुपये की परियोजनाओं की सौगात लेकर आए। एशिया का पहला चावल अनुसंधान केंद्र, हल्दिया से वाराणसी जलमार्ग ने विश्वव्यापी पहचान बनाई।
कैंसर संस्थान, अस्पतालों का उच्चीकरण, बाबतपुर फोरलेन, रिंग रोड सहित सड़कों का जुड़ाव, घाटों का सौंदर्यीकरण सहित अन्य काम पूरे किए गए। काशी का विकास मॉडल अब पूरे देश में चर्चा का विषय भी है और लोग इसका अनुभव भी करते हैं। प्रधानमंत्री के दोबारा काशी से सांसद बनने के बाद विकास की उम्मीदों को और बल मिला है।