वाराणसी। सिर पर गठरी और हाथ में थैला लिए महिला-पुरुषों की टोलियां सुबह से ही आगे बढ़ती जा रही थीं। किसी के पांवों में जूते, किसी के चप्पल तो कोई नंगे पांव ही मां गंगा और बाबा दरबार की ओर बढ़ रहा था। कोई रथयात्रा तो कोई मैदागिन और अस्सी घाट की ओर से चला आ रहा है। जयकारों से रास्ते गूंज रहे थे। यह दृश्य मंगलवार को दशाश्वमेध घाट और बाबा विश्वनाथ मंदिर जाने वाले मार्गों पर दिखा। श्रद्धालुओं को बाबा की एक झलक पाने के लिए करीब पांच किमी पैदल चलना पड़ा।
मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में शाही स्नान के बाद श्रद्धालु दर्शन पूजन के लिए काशी पहुंचे। मंगला आरती के बाद से बाबा विश्वनाथ मंदिर के पट दर्शन के लिए खोले गए, तब से लेकर शयन आरती तक श्रद्धालुओं का तांता दर्शन के लिए लगा रहा। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक लंबी कतारों में लगे बाबा की झलक पाने के इंतजार में घंटों खड़े रहे, लेकिन उनके चेहरे पर न तो कोई शिकन दिखी और न ही थकान। श्रद्धालु महादेव के जयकारे लगाते हुए आस्था में मगन रहे। विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के अनुसार, ढाई लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पूजन किया। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के बाहर तीन और परिसर के अंदर करीब दो किलोमीटर लंबी जिगजैग आकार में बल्लियां लगाकर बैरिकेडिंग की गई थी।